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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख का संदेश : पशु चिकित्सक देश की अर्थव्यवस्था के अहम स्तंभ

– मोहन भागवत ने दिया आह्वान: क्लिनिक से बाहर निकलें, समाज के व्यापक हित में निभाएं भूमिका

– नागपुर संगोष्ठी में सह-अस्तित्व पर जोर: मानव, पशु और प्रकृति के संतुलन की जरूरत

नागपुर :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने पशु चिकित्सकों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देश के आर्थिक विकास में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने विशेषज्ञों से अपील की कि वे अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों के दायरे से बाहर निकलें और समाज व अर्थव्यवस्था के प्रति अपने नजरिए को व्यापक बनाएं. नागपुर में ‘इंडियन सोसाइटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस’ और ‘महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य पालन विज्ञान विश्वविद्यालय’ द्वारा आयोजित एक साझा संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने प्रकृति के संतुलन पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि, सह-अस्तित्व की भावना ही भविष्य का आधार है. मनुष्यों, जानवरों और प्रकृति के बीच एक बेहतर सामंजस्य होना अनिवार्य है. समाज को आज गंभीरता से यह सोचने की जरूरत है कि हम एक संतुलित और सुरक्षित सह-अस्तित्व कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं.

पशु चिकित्सकों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि अक्सर लोग यह मानते हैं कि एक वेटनरी डॉक्टर की भूमिका केवल क्लिनिक या इलाज तक सीमित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें अपनी इस सोच को बदलने की आवश्यकता है. पशु चिकित्सक केवल जानवरों के विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे समाज के एक महत्वपूर्ण हितधारक हैं जो देश की जीडीपी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सीधा योगदान देते हैं. आपको खुद के लिए एक बड़ी भूमिका की कल्पना करनी होगी. अपने संबोधन के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने आवारा कुत्तों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समाज में दो ध्रृवीय प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं. कुछ लोग समर्थन में हैं तो कुछ कड़ा विरोध कर रहे हैं.

आवारा कुत्तों के मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह

इस तरह के विवादित और संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि हमें समाधान के लिए वैकल्पिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पक्ष की भावनाएं आहत न हों और समस्या का वैज्ञानिक समाधान भी निकल सके. डॉ. मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में डेयरी, पशुपालन और ‘वन हेल्थ’ एप्रोच पर सरकार का विशेष ध्यान है. उन्होंने विशेषज्ञों को प्रेरित किया कि वे न केवल पशु स्वास्थ्य, बल्कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच की कड़ी बनकर काम करें.

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