– टेंडर पूरा लेकिन रोड अधूरी पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट एवं ठेकेदार के साठ गांठ से जानबूझकर छोड़ा गया
यासीन शेख, गोंदिया :- गोंदिया तहसील के अंतर्गत आने वाली फूलचूर से तुमखेड़ा खुर्द डामरीकरण होते हुए बनी हुई है, लेकिन कहीं जगह अनियमत्ता के कारण पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट ने कई जगह रोड ही नहीं बनाया गड्ढे ही गड्ढे रह गए लेकिन कहीं जगह डामर ही नहीं डाले और उसकी ऊपर बारीक चूरी डालकर उसे ऐसे ही छोड़ दिया गया। सूत्रों से खबर मिली है कि यहां साठ गांठ पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर्स और तमाम उससे जुड़े अधिकारी शामिल है पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट की रोड में जब दोनों तरफ शुरू से लेकर के आखिरी तक सफेद पेंट लगाए जा रहे हैं किंतु यह पेंट आधा अधूरा ही लगा है। खास बात यह है कि पांगोली नदी का पुल के ऊपर वहां पर डामरीकरण हुआ ही नहीं और बिल निकाल लिया गया, आखिरी बिल निकालने हेतु सभी जगह बड़े-बड़े बोर्ड लगवा दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है रोड़ों की उच्च अधिकारी द्वारा जांच की जाए और अनियमत्ता अगर होती है तो ठेकेदारों के ऊपर एवं सम्मिलित अधिकारी अभियंता के ऊपर फौजदारी गुना दाखिल किया जाए। जहां पर डाबर नहीं डाली हुई है वहां पर डाबर डाल करके फिर से रोड बनाई जाए। कई जगह डामर ही नहीं डाला हुआ है सिर्फ चूरी ही डाली हुई है।
फूलचूर से तुमखेड़ा खुर्द डामरीकरण रोड मामला
आए दिन वहां पर चार से पांच दिनों में तीन घटनाएं हो चुकी है रोड पर बाइक से स्लिप होकर के कई लोग गिरे हुए हैं, जख्मी हुए हैं। ठेकेदार और अभियंता को बताने के बाद भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया इस पर सवाल यह है कि, जिस तरीके का टेंडर रोड बनाने के लिए हुआ है उस तरीके का मजबूतीकरण वाले रोड बनी ही नहीं ऐसे, सूत्रों से खबर मिली है। आने जाने वाले जितने भी गांव के लोग हैं उनका कहना है कि अनियमित पाई गई है संबंधित अधिकारियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ऐसे नागरिकों में असंतोष की भावनाएं निर्माण हो चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सार्वजनिक बांधकाम विभाग श्रेणी क्रमांक 1 कब तक ठेकेदार के ऊपर एक्शन ले रहे हैं। लोगों द्वारा आरोप लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदारों का बिल तुरंत रोक दिया जाए जब तक कि रोड ठीक तरीके से नहीं बने तब तक। कार्रवाई होगी कि नहीं होगी यह एक विषय बना रहेगा अगर यह कार्रवाई जल्द से जल्द नहीं हुई या जल्द से जल्द रोड़ों का निपटारा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के ऊपर उच्च अधिकारियों से शिकायत करके जांच की मांग.








