– बड़े निवेश दावे, धरातल पर सुस्ती
– बुटीबोरी बना उद्योगों की पहली पसंद, अतिरिक्त 5 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण पर टिकी उम्मीदें
नागपुर :- दावोस में वल्र्ड इकानॉमिक फोरम हो या नागपुर में आयोजित एडवांटेज विदर्भ, नागपुर और विदर्भ पिछले एक साल से करोड़ों के सामंजस्य करार के कारण सुर्खियों में रहे हैं. इन दोनों फोरम के माध्यम से बड़ी संख्या में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस निवेश का अधिकांश हिस्सा अतिरिक्त बुटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में आना है. हालांकि, वास्तविकता यह है कि अतिरिक्त बुटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में आज जमीन उपलब्ध नहीं है और अतिरिक्त पांच हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण भी पूरा नहीं हुआ है. इस वजह से उद्यमियों के सामने ऐसी स्थिति आ गई है कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर तो हो गए हैं लेकिन जमीन नहीं मिली है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दावोस-2०25 में रा’य के लिए किए गए 15.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश में से लगभग 4.9 लाख करोड़ रुपये विदर्भ को मिले हैं. दावोस-2०26 में 5.92 लाख करोड़ रुपये के अन्य समझौतों की घोषणा की गई है. इस प्रकार, दो वर्षों में नागपुर-विदर्भ के लिए 11.38 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की गई है. इसके अलावा, एडवांटेज विदर्भ-2०25 में 3 कंपनियों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं.
2०26 में 14,8०0 करोड़ रुपये के अनुबंध हुए हैं और 8 कंपनियों के साथ लगभग 42 हजार करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस माध्यम से कुल 56.8 हजार करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया गया है. हालांकि, दावोस के तहत 51 समझौता ज्ञापनों में से केवल 12 परियोजनाओं और विदर्भ में 15 समझौतों में से केवल 2 परियोजनाओं को ही भूमि प्राप्त हुई है. जिन कंपनियों की परियोजनाओं को भूमि प्राप्त हो चुकी है या जिन पर प्रारंभिक कार्य चल रहा है, उन्हें भूमि आवंटित की गई है. बुटीबोरी अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र में, अब तक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, गोयल प्रोटीन्स, भारत इलेक्ट्रिकल, बैद्यनाथ बायोफ्यूल्स, एल. जी. बालकृष्णन एंड ब्रास, क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन लिमिटेड, पैनोर्ड रिकॉर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अवाडा इलेक्ट्रो, जेएसडब्ल्यू रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, संगम सोलर वन प्राइवेट लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू एनर्जी पीएसपी ङ्गढ्ढ लिमिटेड, वधान लिथियम प्राइवेट लिमिटेड, एक्ससियो लॉजिस्टिक्स पार्क्स, होसुंग कॉर्पोरेशन इंडिया को भूमि आवंटित की गई है. इनमें से अधिकतर परियोजनाएं फिलहाल निर्माण के प्रारंभिक चरण में हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद भी प्रतीक्षारत कंपनियों को कितना इंतजार करना पड़ेगा. समझौता ज्ञापनों की संख्या बढऩे के साथ ही परियोजनाओं को शुरू करने के लिए आवश्यक भूमि आवंटन, पर्यावरण मंजूरी, डीपीआर, वित्तपोषण या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने की आवश्यकता है.
भूमि आवंटन और मंजूरियों की रफ्तार धीमी—कंपनियां इंतजार में
विदर्भ में औद्योगिक क्रांति की उम्मीद जगाने वाली बड़ी घोषणाओं के बावजूद, वास्तविकता में अधिकांश परियोजनाएं अभी भी कागजों पर ही हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले वर्ष हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों को देखते हुए, अधिकांश कंपनियों ने अतिरिक्त बूुटीबोरी औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश करने की तत्परता दिखाई है. वर्तमान में, अतिरिक्त बूटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में कोई भूमि शेष नहीं है. परिणामस्वरूप, अतिरिक्त पांच हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है. यह ज्ञात है कि उस भूमि की भी कमी होने की आशंका है.








