– करोड़ों में खरीदा वर्दी का कपड़ा, साड़ियां पावडर और केमिकल, रखे-रखे बर्बाद…
पुणे :- पुणे मनपा के अफसरों ने ऐसा कारनामा किया है, जिसे देखकर आला अफसरों की आंखें भी फटी रह गई हैं। मामला भंडार विभाग से संबद्ध है। करीब 11 साल पहले कर्मियों के लिए वर्दी का कपड़ा और साड़ियां खरीदी गई थीं। उनमें से एक भी वीं या साड़ी कर्मियों को नहीं दी गई। इसी तरह लगभग ढाई साल पहले लाखों रुपए खर्च कर सिटी वेस्ट ट्रीटमेंट पावर और 4000 लीटर लिक्विड ईकोचिप खरीदा गया। समय पर उपयोग नहीं होने से रसायनों की शक्ति खत्म हो गई। इससे मनपा खजाने को लगभग दो करोड़ रुपए की चपत लगी है। मामले की भनक लगते ही मनपा प्रशासन ने केंद्रीय भंडार विभाग में हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले में करीब 20 अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। करोड़ों रुपए का सामान सालों तक बिना इस्तेमाल के धूल फांकता रहा, इसका खुलासा होने के बाद मनपा आयुक्त नवलकिशोर राम द्वारा नियुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। नोटिस पाने वालों में उपायुक्त स्तर के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और चार सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं।
मनपा भंडार विभाग ने 2015 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए लगभग 75 लाख रुपए का वर्दी का कपड़ा और 69.71 लाख रुपए की साड़ियां खरीदी थीं। संबंधित ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन पिछले नौ साल में वदी सामग्री एक भी कर्मचारी को वितरित नहीं की गई। सारा सामान वड़गांव बुद्रुक स्थित सावित्रीबाई फुले अध्ययन केंद्र में पड़ा पाया गया। इसके अलावा कचरा प्रबंधन विभाग की मांग पर अगस्त-23 में लगभग 50 लाख रुपए खर्च करके 20 हजार किलो सिटी बेस्ट ट्रीटमेंट पावडर और चार हजार लीटर लिक्विड ईकोचिप खरीदी गई थी। समय पर उपयोग नहीं होने के कारण रसायनों की शक्ति खत्म हो गई है और वे अब किसी काम के नहीं रह गए हैं।
महासचिव हेमेत संभुस ने नवंबर 25 में उजागर किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भंडार विभाग, कचरा प्रबंधन विभाग और लेखा एवं वित्त विभाग ने केवल ठेकेदारों के बिल पास करने के लिए काम किया। उन्होंने मांग की थी कि संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और हुए नुकसान की वसूली उनके वेतन से की जाए। शिकायत के बाद आयुक्त ने अतिरिक्त आयुक्त ओमप्रकाश दिवटे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने खरीद प्रक्रिया, भंडारण, वितरण रिकॉर्ड और भुगतान फाइलों की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए 20 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।
आठ अफसरों ने जवाब देने की जरूरत भी नहीं समझी: सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। 20 में से 12 अधिकारियों ने जवाब दे दिया है, जबकि शेष आठ ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। जवाब देने की समय सीमा समाप्त हो गई है, इसलिए अब अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और वित्तीय वसूली की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
इन अफसरों को थमाया गया है नोटिस
मामले में मनपा ने स्वास्थ्य विभाग के उपअधीक्षक विकास निवांगुने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे, विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता योगेश माली, उपायुक्त किशोरी शिंदे, आपदा प्रबंधन अधिकारी गणेश सोनूने, तत्कालीन मुख्य अभियंता-विद्युत श्रीनिवास कैदुल (अब सेवानिवृत्त), अतिक्रमण विभाग के उप अधीक्षक सुनील चंदरे, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी गिरीश पटकी (अब सेवानिवृत्त), अधीक्षक अभियंता (विद्युत) रामदास तारू, प्रशासनिक अधिकारी अविनाश वंजारी, तत्कालीन सतर्कता विभाग के उपायुक्त डॉ. उदय टेकाले, तत्कालीन ठोस अपशिष्ट विभाग की उपायुक्त आशा राउत, उपायुक्त संदीप कदम, तत्कालीन कार्यकारी अभियंता मुकुंद बर्वे, उपायुक्त नितिन शिदी, तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता आशीष कोल्गे आदि को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया हैं।








