– उद्धव ठाकरे करेंगे शक्ति प्रदर्शन
नागपुर :- शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। इसी कड़ी में आगामी 18 जुलाई को नागपुर में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में ‘रामरक्षा’ आंदोलन आयोजित किया जाएगा। पार्टी इसे केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के सम्मान और राम मंदिर की गरिमा की रक्षा के लिए जनआंदोलन बता रही है।
महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर को इस आंदोलन के लिए चुनना राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नागपुर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी है। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी) का यह कार्यक्रम सीधे भाजपा और संघ के गढ़ में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया है कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में बड़े पैमाने पर कथित घोटाला हुआ है। पार्टी का कहना है कि भाजपा शासन में ही भगवान श्रीराम के मंदिर की दानपेटी सुरक्षित नहीं रह सकी और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई है और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को अपने पद छोड़ने पड़े हैं, लेकिन कथित मुख्य आरोपी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।
विदर्भ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन करेगी शिवसेना (यूबीटी)
पार्टी के अनुसार, नागपुर का ‘रामरक्षा’ आंदोलन विदर्भ में शिवसेना (यूबीटी) का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और जनसंपर्क कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे, वरिष्ठ पदाधिकारी, विधायक, सांसद तथा विदर्भ के सभी प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि नागपुर सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र से हजारों की संख्या में शिवसैनिक और रामभक्त इस आंदोलन में भाग लेंगे। इसके लिए विभिन्न जिलों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
18 जुलाई का यह कार्यक्रम नागपुर ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए शिवसेना (यूबीटी) भाजपा के हिंदुत्व के मुद्दे को उसी के गढ़ में चुनौती देने की कोशिश करेगी।








