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महाराष्ट्र में गुटखे पर एक साल का प्रतिबंध

– 20 जुलाई से पूरे राज्य में लागू होगा आदेश

– गुटखा, मावा, खैनी, पान मसाला, स्वादयुक्त तंबाकू व सुपारी के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन पर रोक

मुंबई/नागपुर :- महाराष्ट्र सरकार ने तंबाकूजनित उत्पादों के खिलाफ अपनी सख्त नीति को जारी रखते हुए गुटखा, मावा, खैनी, निकोटीनयुक्त पान मसाला, स्वादयुक्त तंबाकू और स्वादयुक्त सुपारी के निर्माण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध एक वर्ष के लिए फिर बढ़ा दिया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश 20 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होगा।

इस बार जारी आदेश की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अलग-अलग पाउच में तंबाकू और पान मसाला बेचकर उपभोक्ताओं से उन्हें मिलाकर सेवन कराने की व्यवस्था को भी प्रतिबंध के दायरे में शामिल किया गया है। यानी अब अलग-अलग पैकिंग के माध्यम से प्रतिबंध से बचने की कोशिश भी स्वीकार नहीं की जाएगी।खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अनुसार यह निर्णय जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 11 पृष्ठों की अधिसूचना में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC), टाटा मेमोरियल अस्पताल सहित 30 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों तथा सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए प्रतिबंध को उचित ठहराया गया है। आदेश में कहा गया है कि तंबाकू और निकोटीनयुक्त उत्पादों के सेवन से कैंसर सहित कई गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ता है, इसलिए इन उत्पादों की उपलब्धता पर नियंत्रण आवश्यक है।

अधिसूचना के अनुसार राज्य में गुटखा, मावा, खैनी, निकोटीनयुक्त पान मसाला, स्वादयुक्त तंबाकू तथा स्वादयुक्त सुपारी के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

एफडीए ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ छापेमारी, माल जब्ती और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी संगठित अवैध नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में वर्ष 2012 से गुटखा और निकोटीनयुक्त पान मसाले पर प्रतिबंध लागू है। हाल के दिनों में अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज होने के साथ ही कुछ व्यापारी संगठनों ने सख्त कानूनी प्रावधानों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया है। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उद्देश्य केवल अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि विशेष रूप से युवाओं और आम नागरिकों को तंबाकू जनित उत्पादों के दुष्प्रभाव से बचाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है।यदि यह दैनिक भास्कर, पत्रिका, लोकमत, नवभारत या दैनिक जागरण जैसी किसी विशेष शैली में चाहिए, तो उसी फॉर्मेट और भाषा-शैली में भी तैयार किया जा सकता है।


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