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साइबर ठगी: 15 दिन में 25 लाख लौटाए

– सरकार का बड़ा फैसला, कोर्ट के बिना वापस मिलेगा ठगी का पैसा

नागपुर :- साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए लोगों को अपनी राशि वापस पाने के लिए अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई तकनीक आधारित प्रणाली के माध्यम से अब स्थानीय साइबर पुलिस ही निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर सीधे पीड़ितों के बैंक खाते में फंसी हुई रकम वापस कर सकेगी।

इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र -I4सी ने मनी रिस्टोरेशन मॉडल और ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉडल नामक दो डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम जल्द से जल्द वापस कराना और शिकायतों का त्वरित निपटारा करना है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है और वह तत्काल इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में देता है, तो साइबर पुलिस संबंधित बैंक खाते को तुरंत फ्रीज कर सकती है। इससे ठगों द्वारा पैसे निकालने से पहले ही रकम सुरक्षित हो जाती है। पहले ऐसी स्थिति में पीड़ित को फ्रीज की गई राशि वापस पाने के लिए अदालत से आदेश लेना पड़ता था, जिसमें कई सप्ताह या कई महीने लग जाते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो गई है।

50 हजार रुपये तक की राशि घंटों में मिलेगी वापस

नई प्रणाली के अनुसार, यदि फ्रीज की गई राशि 50 हजार रुपये तक है, तो साइबर पुलिस बिना किसी न्यायालयीन आदेश के सीधे वह राशि पीड़ित को वापस दिला सकती है। इससे पीड़ितों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा, यदि ठगों ने बड़ी रकम को कई छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन में बांट दिया है और प्रत्येक लेन-देन 50 हजार रुपये से कम का है, तो ऐसे मामलों में भी मनी रिस्टोरेशन मॉडल (एमआरएम) के माध्यम से पुलिस पीड़ित की राशि वापस कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकेगी।

निवेश, डिजिटल अरेस्ट और फिशिंग जैसे मामलों में मिलेगी राहत:

देशभर में इन दिनों साइबर अपराधी फर्जी निवेश योजनाओं, बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक, केवाईसी अपडेट और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अब यह नई व्यवस्था पीड़ितों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

नागपुर में 700 मामलों का निपटारा, 25 लाख रुपये लौटाए

नागपुर साइबर क्राइम ब्रांच ने 1 जुलाई से इस नई प्रणाली को लागू करना शुरू कर दिया है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। महज 15 दिनों में साइबर पुलिस ने लगभग 700 मामलों का निपटारा करते हुए करीब 25 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए हैं। यह अभियान पुलिस उपायुक्त (साइबर) दीपक अग्रवाल और सहायक पुलिस आयुक्त शिंदे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। इस कार्य में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुधीर बोरकुटे, सुरेश दमरे तथा उनकी टीम सक्रिय भूमिका निभा रही है।

पुलिस की अपील

साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होती है तो वे बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, www.cybercrime.gov.in पोर्टल या अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि ठगों के खाते फ्रीज कर पीड़ित की रकम सुरक्षित वापस दिलाई जा सके।

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