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न्यायपालिका में संवैधानिक मूल्यों की प्रतिबद्धता जरूरी

– ‘द वॉइस ऑफ जस्टिस के विमोचन पर बोले उपराष्ट्रपति

नागपुर :- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति भवन में पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों के संकलन पर आधारित पुस्तक ‘द वॉइस ऑफ जस्टिस : जस्टिस गवई स्पीक्स’ का विमोचन किया।

प्रो. (डॉ.) एस शिवकुमार द्वारा संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन थॉमसन रॉयटर्स ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के सहयोग से किया है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक न्यायिक चिंतन, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें संवैधानिक व्यवस्था, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन से जुड़े महत्वपूर्ण विचार संकलित हैं जो देश में संवैधानिक विमर्श और विधि अध्ययन को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला दस्तावेज है जिसने पिछले 75 वर्षों में निरंतरता और परिवर्तन, अधिकार और जवाबदेही तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखा है। संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है, जबकि संसद की संशोधन शक्ति समय की आवश्यकताओं के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने में सहायक है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संविधान की रक्षा और कानून के शासन में लोगों का विश्वास बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकार जितना आवश्यक है, उतना ही न्यायिक संयम भी जरूरी है। मजबूत संस्थाएं, संवैधानिक अनुशासन, संस्थागत ईमानदारी, जनविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ही न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाती है।

कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई, एस. शिवकुमार, गौरी शंकर नातेशन समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।


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