– एसीबी ने रंगेहाथ पकड़े तीन कर्मचारी
– आखिर वन विभाग का भी लग गया नंबर!
चंद्रपुर :- जिस वन विभाग पर जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वहीं रिश्वतखोरी के कथित खेल पर अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जोरदार चोट कर दी है। सोमवार को भद्रावती वन परिक्षेत्र कार्यालय में एसीबी ने ऐसा शिकंजा कसा कि पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। क्षेत्र सहायक कोमल नरसिंगराव घुगलोत(42), बीट वनरक्षक संदीप पुंढलिक पारवे (39) और वन मजदूर ललित नागपुरे को 20 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया।
एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता का ट्रैक्टर वन विभाग ने जब्त किया था। आरोप है कि ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच में मांग की पुष्टि की और जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार जैसे ही रिश्वत की रकम स्वीकार की गई, पूरी टीम ने मौके पर ही आरोपियों को दबोच लिया। जांच के दौरान वन मजदूर की कथित भूमिका सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार किया गया।
क्या अब खुलेगा ‘वसूली राज’ का पूरा सच?
भद्रावती की यह कार्रवाई केवल तीन लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जब्त वाहनों को छोड़ने के नाम पर रिश्वत मांगने का यह अकेला मामला था, या कहीं और भी ऐसी शिकायतें मौजूद हैं? इसका जवाब आगे की जांच से सामने आएगा।
रिश्वत की गर्मी पर एसीबी का करारा तमाचा
सरकारी कुर्सी सेवा के लिए होती है, सौदेबाजी के लिए नहीं। लेकिन जब जिम्मेदारी पर रिश्वत हावी होने लगे, तब एसीबी की कार्रवाई यह संदेश देती है कि कानून की पकड़ देर से सही, लेकिन मजबूत होती है। भद्रावती की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसी का रुख सख्त है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। आगे की जांच एसीबी, चंद्रपुर द्वारा की जा रही है।





