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वन विभाग के कुप्रबंधन पर उठे सवाल

◼️पवनी वनक्षेत्र पिछले आठ दिनों से हवा में 

◼️वन सुरक्षा के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार ?

सचिन चौरसिया, रामटेक :- नागपुर वन विभाग के अंतर्गत आने वाला पावनी वनक्षेत्र नियंत्रक (बफर जोन) पिछले आठ दिनों से बिना नियमित वनक्षेत्र अधिकारी (आरएफओ) के कार्यरत है। वनक्षेत्र अधिकारी के तबादले के बाद किसी को भी आधिकारिक प्रभार नहीं दिया गया है, जिससे इस वनक्षेत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पवनी वनक्षेत्र के तत्कालीन वनक्षेत्र अधिकारी लक्ष्मीकांत ठाकरे के वड़सा तबादले के बाद विशेष बाघ संरक्षण बल के वनक्षेत्र अधिकारी अभिजीत माने को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। हालांकि, उनके भी तबादले के बाद यह पद फिर से रिक्त हो गया। इसके बाद कहा जा रहा है कि नागपुर मोबाइल टीम के वनक्षेत्र अधिकारी निशिकांत कापगेट को नियुक्त किया गया है। लेकिन उन्होंने अभी तक पवनी में कार्यभार नहीं संभाला है या वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव है। इस संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है और कई विवाद उत्पन्न हो चुके हैं। अधिकारियों का विदाई समारोह आयोजित किया जा रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग यह प्राथमिक जिम्मेदारी भूल गया है कि प्रभार किसे सौंपा जाए। अधिकारियों की कमी के कारण, दैनिक प्रशासनिक कार्य, वन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई, वन्यजीव संरक्षण और वन गश्त की जिम्मेदारी वास्तव में किसके पास है।

वरिष्ठ हस्तक्षेप की आवश्यकता

पवनी वनक्षेत्र में बाघों और तेंदुओं की बड़ी आबादी है, और अवैध कटाई और शिकार का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में इस क्षेत्र को प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखना उल्टा पड़ सकता है। जब हमने इस संबंध में सहायक उपवन संरक्षक पूजा लिंबगांवकर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वन प्रेमियों की मांग है कि वरिष्ठ अधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करें और इस प्रशासनिक अनिश्चितता को दूर करें।

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