– जिन ग्राहकों के ऋण बकाया थे, उनके लेन-देन बंद कर दिए
– ‘अगर आपको हिंदी नहीं आती तो किसी दूसरे कर्मचारी से बात करें’, मैनेजर ने प्रतिनिधि को आदेश
सचिन चौरसिया, रामटेक:- मंगलवार को शीतलवाड़ी स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में किसान बैंक प्रबंधक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। किसान ऋण माफी सूची को अंग्रेजी में प्रकाशित करने को लेकर विरोध कर रहे थे। किसान सूची में अपना नाम ढूंढने का अनुरोध कर रहे थे। कुछ किसान सूची को अंग्रेजी में देखकर आश्चर्यचकित रह गए। एक प्रतिनिधि किसी काम से बैंक शाखा में गया था, तभी यह घटना घटी। किसानों ने बैंक प्रबंधक के कार्यालय में जाकर इस बारे में पूछने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही प्रतिनिधि ने मराठी में बोलना शुरू किया, बैंक प्रबंधक ने कहा, ‘अगर आप हिंदी नहीं बोलते हैं, तो वहां मौजूद किसी अन्य कर्मचारी से बात करें।’ रामटेक तालुका जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग ९० से ९५ प्रतिशत किसान मराठी भाषी हैं। कई किसानों के बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में खाते हैं। बैंक प्रबंधकों ने बताया कि जिन किसानों ने ऋण चुकाने में चूक की है, उनके खाते लेनदेन के लिए बंद कर दिए गए हैं। कुछ किसान ऐसे भी हैं जिन्हें विभिन्न योजनाओं के तहत उनके खातों में मानदेय मिलता है, लेकिन लेनदेन बंद होने के कारण ऐसे किसान फिलहाल मानदेय से वंचित हैं।
हिंदी बोलने वाले बैंक प्रबंधक नहीं चाहिये
इस तालुका में लगभग ९० से ९५ प्रतिशत किसान मराठी भाषी हैं, इसलिए वे आमतौर पर हिंदी नहीं बोल पाते हैं। अतः किसानों का कहना है कि वे ऐसे तालुका की किसी बैंक शाखा में हिंदी बोलने वाले बैंक प्रबंधक को नहीं चाहते हैं।
तहसीलदार ने दिए जांच के आदेश
प्रतिनिधि ने शीतलवाड़ी स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में घटी पूरी घटना तहसीलदार रमेश कोळपे के समक्ष प्रस्तुत की। तहसीलदार कोळपे ने तुरंत सहायक रजिस्ट्रारों को संबंधित बैंक शाखा में जाकर जांच करने का आदेश दिया। तहसीलदार रमेश कोळपे ने प्रतिनिधियों से कहा, ‘मैंने किसानों के ऋण माफी की सूचियां मराठी में भेजी थीं। बैंक शाखा में मुझे अंग्रेजी में सूचियां कैसे मिलेंगी?’





