– मुंढे के बयान पर बावनकुले ने कहा रेस्टोरेंट बंद होने जैसी बातें न करें
नागपुर :- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा सावजी व्यंजनों को लेकर की गई टिप्पणी पर शुरू हुआ विवाद अब और तेज हो गया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सावजी व्यवसाय के समर्थन में खुलकर सामने आते हुए अधिकारियों को इस तरह की टिप्पणी करने से बचने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि सावजी केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि विदर्भ की पहचान और यहां की खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमरावती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सावजी मटन को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, अगर मैं सावजी मटन खाऊंगा तो एक महीने तक बीमार पड़ जाऊंगा और मुझे अस्पताल जाना पड़ेगा। मुंढे की इस टिप्पणी के बाद सावजी रेस्टोरेंट संचालकों और विभिन्न संगठनों ने नाराजगी जताई। कुछ संगठनों ने इसे विदर्भ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का अपमान बताया और बयान पर आपत्ति दर्ज कराई।
बावनकुले ने क्या कहा?
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुंढे की टिप्पणी पर सीधे तौर पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सावजी केवल भोजन नहीं, बल्कि विदर्भ की पहचान है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार पीढ़ियों से हजारों परिवार सावजी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बावनकुले ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सावजी व्यवसाय हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। इसलिए ‘रेस्टोरेंट बंद पड़ जाएंगे’, ‘व्यवसाय खत्म हो जाएगा’ या इससे कारोबार को नुकसान होगा, इस तरह की टिप्पणियां अधिकारियों को नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी के बयान का असर हजारों व्यवसायियों और उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ सकता है। इसलिए अधिकारियों को संवेदनशील मुद्दों पर बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।





