– बिजली के बिना दूषित पानी को पीने योग्य बनाने की तकनीक
नागपुर :- असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सीएसआईआर-नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसआईआर-नीरी), नागपुर ने ‘नीरी-जार’ इंस्टेंट वाटर फिल्टर तकनीक को राहत कार्य में शामिल किया है। इसके तहत जोरहाट जिले के जोनाकीमोंडल गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच घरेलू और सामुदायिक उपयोग के लिए फिल्टर यूनिट का प्रदर्शन और वितरण किया गया।
गांव में 5 घरेलू और 5 सामुदायिक नीरी-जार यूनिट वितरित की गईं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों तक आगे वितरण के लिए 70 घरेलू और 20 सामुदायिक यूनिट जोरहाट के जिला आयुक्त को सौंपी गईं। इन यूनिट को सीएसआईआर-नीरी के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन और सीएसआईआर-एनईआईएसटी, जोरहाट के निदेशक डॉ. वी.एम. तिवारी ने औपचारिक रूप से सौंपा। यह पहल सीएसआईआर के विभिन्न संस्थानों के संयुक्त प्रयास से संचालित की गई। नीरी की जल शोधन तकनीक और एनईआईएसटी की स्थानीय आधारभूत सुविधाओं एवं मैदानी कार्यक्षमता को मिलाकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तकनीक को तेजी से पहुंचाने का प्रयास किया गया।

सभी यूनिट सीएसआईआर-एनईआईएसटी, जोरहाट में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से महज दो दिनों में तैयार की गईं। इससे आपदा के दौरान इस तकनीक को स्थानीय संसाधनों के जरिए तेजी से तैयार और उपयोग किए जाने की क्षमता सामने आई है। इस पूरी पहल का मार्गदर्शन डॉ. एस. वेंकट मोहन और डॉ. पारस पुजारी ने किया। अभियान का नेतृत्व सीएसआईआर-नीरी के वैज्ञानिक डॉ. अतुल मालधुरे ने किया। उनके साथ डॉ. अमृत कुमार, डॉ. रीमा बिस्वास और डॉ. अभिषेक बिसारिया सहित सीएसआईआर-नीरी के वैज्ञानिक तथा डॉ. धनजीत दास, डॉ. सुमित सिंह और सीएसआईआर-एनईआईएसटी, जोरहाट की टीम ने सहयोग किया।
बाढ़ और आपदा के समय उपयोगी
नीरी-जार सीएसआईआर-नीरी द्वारा विकसित आपातकालीन जल उपचार तकनीक है, जिसका उद्देश्य बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उपलब्ध स्थानीय जलस्रोतों से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। बाढ़ के दौरान जलस्रोत दूषित होने और नियमित जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में बिजली की आवश्यकता न होना, सरल एवं तेज इस्तेमाल, घरेलू और सामुदायिक स्तर पर उपयोग तथा उपलब्ध दूषित पानी के उपचार की क्षमता शामिल है। सीएसआईआर-नीरी के इस प्रयास को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन पेयजल सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





