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काचीपुरा नाले का रास्ता साफ, 4 अवैध पुल ध्वस्त

– HC के निर्देश पर मनपा की कार्रवाई, जल निकासी में बाधक निर्माण हटाए

नागपुर :-  बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के 4 अगस्त के निर्देश के बाद नागपुर महानगरपालिका ने सोमवार को काचीपुरा-ईस्ट शंकरनगर क्षेत्र में नाले पर बनाए गए चार अवैध पुलों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई का उद्देश्य नाले के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना और बारिश के पानी की निकासी में आ रही बाधाओं को दूर करना था।

मनपा अधिकारियों के अनुसार, नाले के कुछ हिस्सों पर सीमेंट-कंक्रीट की स्लैब डालकर रास्ते बनाए गए थे। इन निर्माणों के कारण नाले का प्रवाह बाधित होने के साथ ही मनपा की जमीन पर भी अतिक्रमण हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक आवागमन के लिए इन पुलों का निर्माण बिना अनुमति किया गया था। यह कार्रवाई केंद्रीय अतिक्रमण विरोधी दस्ता-2 और धरमपेठ जोन की अतिक्रमण विरोधी टीम ने संयुक्त रूप से की। अभियान में जेसीबी मशीनों की मदद से चारों अवैध पुलों को हटाया गया। कार्रवाई कॉर्नर हाउस ढाबा की ओर जाने वाले मार्ग, अपना ढाबा व एनएच-1 की ओर जाने वाले रास्ते, जगदीश सावजी के प्रतिष्ठान के पास तथा साईं वाटिका की ओर जाने वाले मार्ग पर की गई।

कार्रवाई के दौरान साईं वाटिका के प्रबंधक विजय तलेवार ने कथित रूप से अतिक्रमण विरोधी कर्मचारियों का विरोध करते हुए उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और विजय तलेवार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्हें पुलिस थाने ले जाने के बाद मनपा की टीम ने कार्रवाई दोबारा शुरू कर इसे पूरा किया।

नाले का बड़ा हिस्सा हो चुका था बाधित

काचीपुरा नाला पश्चिम शंकर नगर से पूर्व शंकर नगर की ओर बहता है और क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूर्व में सामने आया था कि पूर्व शंकर नगर में अवैध सीमेंट पुलों और नाले को ढकने के कारण करीब 400 मीटर के हिस्से में केवल 50 मीटर नाला खुला रह गया था, जबकि बाकी हिस्से पर पुल या कवरिंग कर दी गई थी। शहर में भारी बारिश के दौरान बार-बार जलभराव की स्थिति को देखते हुए नाले पर बने अवैध निर्माणों को हटाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे अवरोध नाले की जल वहन क्षमता को कम कर बारिश के दौरान जलभराव का खतरा बढ़ा सकते हैं।

काचीपुरा में अवैध निर्माणों को लेकर हाईकोर्ट की निगरानी के बीच यह कार्रवाई हुई है। अदालत ने वर्ष 2016 में महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम की धारा 53(1) के तहत नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई में देरी पर भी सवाल उठाए थे। एनएमसी अधिकारियों के अनुसार नाले पर मौजूद अन्य अनधिकृत निर्माणों को हटाने की कार्रवाई भी जारी रहेगी। साथ ही शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज प्लान तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

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