रामटेक :- आजकल, युवा पिढी बड़ी संख्या में शराब, जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल हो रहे हैं। इससे कई खुशहाल जिंदगियां बर्बाद हो रही हैं और युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। समाज और मीडिया में इस बारे में लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। युवा बच्चों में शराब का सेवन बढ़ रहा है, लेकिन अब यह १२ साल की उम्र तक सीमित हो गया है। इन बच्चों के दोस्त और माता-पिता उन्हें यह कहकर बहलाते हैं, ‘बीयर शराब नहीं है, आप इसे पी सकते हैं।’ हालांकि, इन बच्चों को भी नहीं पता कि बीयर से शुरू हुआ यह सफर कब रम, वोडका, व्हिस्की या कभी-कभी देसी शराब, मौवा तक पहुंच जाता है। मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, कम उम्र में शराब पीने वाले बच्चों में वयस्क होने पर नशे की लत लगने की २५ प्रतिशत संभावना होती है। इसलिए, किशोरों में शराब के सेवन की बढ़ती दर आने वाली युवा पीढ़ी के लिए एक चेतावनी है। लत के प्रमुख कारण: ऑनलाइन सट्टेबाजी और ऐप्स: मोबाइल फोन पर खेले जाने वाले विभिन्न ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी ऐप्स के कारण बच्चे आसानी से इस रास्ते पर चल रहे हैं। दोस्तों की संगति: गलत संगति और मौज-मस्ती के नाम पर युवा शराब के आदी हो रहे हैं। मानसिक तनाव: अवसाद, नौकरी या पढ़ाई के तनाव को कम करने का गलत विचार लत की ओर ले जा रहा है। अवैध बिक्री: अवैध शराब और जुआ अड्डे गांवों से लेकर शहरों तक आसानी से उपलब्ध हैं। गंभीर परिणाम: आर्थिक नुकसान: कर्ज बढ़ता जाता है और जुए में घरेलू बचत खत्म हो जाती है। अपराध में वृद्धि: युवा लोग पैसा कमाने के लिए चोरी, मारपीट और अन्य अवैध तरीकों का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी नुकसान: कम उम्र में ही लीवर की क्षति और मानसिक स्वास्थ्य बिघड रहा है। सड़क पर, युवा लोग हाथों में बीयर की बोतलें लिए कारों में घूमनां । सड़क पर युवा नशे में धुत होकर हंगामा करणा । नशे की हालत में वे कार की खिड़की खोलकर शरीर के कुछ हिस्से बाहर निकाल कर तेज गति से गाड़ी चलाते हुए स्टंट करना । सट्टा बाजार में जवान लडके “रातों-रात अमीर बनने” के लालच में आते हैं, लेकिन इसका अंत हमेशा भारी नुकसान में होता है। ९९% नुकसान की गारंटी: सट्टा मटका या सट्टा किंग पूरी तरह गणितीय एल्गोरिदम और खाईवालों के मुनाफे पर आधारित होता है। जवान लडके इसमें अपना ९९% पैसा हार जाते है। आर्थिक और मानसिक बर्बादी, कर्ज के जाल में फंसने के कारण कई परिवार पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं और लोग मानसिक तनाव व डिप्रेशन का शिकार बनते हैं।साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी, ऑनलाइन सट्टा चलाने वाली ज्यादातर वेबसाइटें और ऐप्स फर्जी होते हैं। पैसा जीतने के बाद भी वे यूजर को ब्लॉक कर देते हैं और उनका निजी व बैंक डेटा चुरा लेते हैं।
सचिन चौरसिया, मो. नं. 9730901120





