– आरटीआई में खुलासा : 1.28 लाख सागौन के पेड़ भी काटे, सरकार को 31.22 करोड़ रुपये का नुकसान
नागपुर :- महाराष्ट्र के जंगलों में अवैध पेड़ों की कटाई का चिंताजनक मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य के वन क्षेत्रों में 3 लाख 46 हजार पेड़ अवैध रूप से काटे गए। इनमें करीब 1 लाख 28 हजार सागौन के पेड़ शामिल हैं। अवैध कटाई से राज्य सरकार को अनुमानित 31.22 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का आंकड़ा सामने आया है। इनमें अकेले सागौन की अवैध कटाई से 22.57 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
नागपुर के आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में वन विभाग ने यह आंकड़े उपलब्ध कराए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि वन कानून और निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद अवैध कटाई पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण अधिकांश आर्थिक गतिविधियां प्रभावित थीं, इसके बावजूद इसी वर्ष पांच साल की अवधि में सर्वाधिक 81,086 पेड़ों की अवैध कटाई दर्ज की गई। इनमें 31,310 सागौन के पेड़ थे। इससे सरकार को करीब 6.80 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया, जिसमें 4.88 करोड़ रुपये का नुकसान सागौन की अवैध कटाई से हुआ। अवैध कटाई का सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा। 2026 के पहले तीन महीनों में ही वन विभाग ने 17,114 पेड़ों की अवैध कटाई दर्ज की। इनमें 5,774 सागौन के पेड़ शामिल हैं। इस दौरान करीब 1.62 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है, जिसमें सागौन से संबंधित नुकसान 1.09 करोड़ रुपये बताया गया है।
गढ़चिरोली सबसे प्रभावित, नागपुर तीसरे स्थान पर:
जनवरी से मार्च 2026 के दौरान अवैध कटाई के मामलों में गढ़चिरोली सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा, जहां 3,372 पेड़ों की अवैध कटाई दर्ज की गई। इसके बाद ठाणे में 2,756 और नागपुर में 2,647 पेड़ अवैध रूप से काटे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि अवैध कटाई की समस्या आदिवासी बहुल वन क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के वन विभागों में भी बनी हुई है।
पांच साल में 47.14 लाख पेड़ों की कटाई को मंजूरी:
एक ओर अवैध कटाई का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग द्वारा वैध रूप से पेड़ों की कटाई के लिए बड़ी संख्या में प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने का आंकड़ा भी सामने आया है। आरटीआई के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच 45,803 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 47.14 लाख पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई। इनमें 33.63 लाख सागौन के पेड़ शामिल हैं। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भी 6,336 प्रस्ताव मंजूर किए गए, जिनके तहत 8.38 लाख पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई। इनमें करीब 3.05 लाख सागौन के पेड़ शामिल हैं.
विकास परियोजनाओं से भी जंगलों पर दबाव
अवैध कटाई के साथ ही राजमार्ग, खनन, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर लगातार बढ़ता वन भूमि का उपयोग पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट में भी महाराष्ट्र के वन क्षेत्र में 54.5 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे राज्य की हरित संपदा पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता और गहरी हुई है।
बढ़ा जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी वापस
अवैध पेड़ कटाई पर प्रभावी रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र वृक्ष कटाई (विनियमन) अधिनियम, 1964 में संशोधन के जरिए जुर्माना 1,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, पर्यावरणविदों और विधायकों की आलोचना के बाद जुलाई 2025 में यह विधेयक वापस ले लिया गया।
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों ने राज्य में वन संरक्षण और अवैध कटाई पर नियंत्रण की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध कटाई पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी, त्वरित कानूनी कार्रवाई, लकड़ी तस्करी में शामिल गिरोहों पर कठोर कार्रवाई और वन प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।





