– कर्जमाफी और प्रति एकड़ 50 हजार रुपये अनुदान की मांग
नागपुर :- सूखे के लिए घोषित पांच हजार रुपये की सहायता किसानों के साथ क्रूर मजाक है। यह आरोप लगाते हुए विदर्भ राज्य आंदोलन समिति (विराआंस) और किसान संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ‘भीख मांगो’ आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान एकत्रित राशि निवासी जिलाधिकारी इंदिरा चौधरी को सौंपकर इसे मुख्यमंत्री सहायता निधि में जमा करने का अनुरोध किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि इस वर्ष कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते किसानों के सामने चारे और पेयजल की समस्या गंभीर हो गई है। रबी सीजन की बुआई और सिंचाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विदर्भ के अमरावती संभाग के विभिन्न जिलों सहित वर्धा जिले में सूखे और कर्ज के बोझ के कारण किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला जारी होने की बात भी ज्ञापन में कही गई।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि किसानों को क्षेत्रफल की सीमा के बिना प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जाए। खेती से संबंधित सभी कर्ज माफ कर किसानों का सातबारा (भूमि अभिलेख) कर्जमुक्त किया जाए। इसके अलावा खेती की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को नियमित कर संबंधित किसानों को भूमि के पट्टे दिए जाएं। वन अधिकार कानून में लागू तीन पीढ़ियों की शर्त में संशोधन करने तथा सर्पदंश से जान गंवाने वाले किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को भी आर्थिक सहायता देने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं को देखते हुए सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेकर राहत प्रदान करनी चाहिए।
आंदोलन में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के उपाध्यक्ष अरुण केदार, युवा आघाड़ी के प्रांताध्यक्ष मुकेश मासुरकर, सुनील चोखारे, श्रीकांत दौलतकार, संजय चौधरी, प्रशांत नखाते, नरेश निमजे, ज्योति खांडेकर, वसंतराव वैद्य, गुलाबराव धांडे, गिरीश तितरमारे, डॉ. झेलम कटोच, रवींद्र भामोडे, विजय मोंदेकर, सचिन लोणकर, नीलकंठराव अंभोरे, शोभा येवले, संगीता अंबारे, देवराव घोडे, नितिन गोधाने, निखिल मोहनकर, रत्नाकर जगताप, विट्ठल मानेकर और भाऊराव नासरे सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक
आंदोलनकारी जैसे ही जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार के पास पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया। इस पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नाराज आंदोलनकारियों ने करीब एक घंटे तक धरना दिया। इससे कार्यालय में आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार की नीतियों का विरोध किया और दिवाली से पहले मांगें मंजूर कर किसानों को राहत देने की मांग की।








