– शहर की जलापूर्ति पर मंडराया प्रदूषण का खतरा
– हाईकोर्ट के निर्देश और बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति चिंताजनक
नागपुर :- शहर के लिए आपातकालीन जलस्रोत के रूप में इस्तेमाल होने वाला गोरेवाड़ा तालाब में गंदे पानी और घरेलू कचरे का प्रवाह लगातार जारी रहने से जल प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। तालाब में आने वाले पानी में सीवेज और प्लास्टिक कचरा मिलने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से नागपुर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर ऐसे समय में, जब तोतलाडोह बांध का जीवित जलसंग्रह 50 प्रतिशत से नीचे बताया जा रहा है और शहर में जलसंकट की आशंका बढ़ रही है।
मनपा का कहना है कि गोरेवाड़ा तालाब आपातकालीन वैकल्पिक जलस्रोत है और यहां से निकाले जाने वाले पानी को आपूर्ति से पहले उपचारित किया जाता है। हालांकि, इससे तालाब में सीवेज जाने से रोकने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। तालाब में प्रदूषित पानी का प्रवेश रोकना और जलस्रोत को सुरक्षित रखना मनपा के लिए जरूरी है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी सवाल बरकरार
23 जून को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने तालाब के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए तत्काल कदम उठाने संबंधी एक आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश मनपा को दिया था। न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने मनपा को याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर निर्णय की जानकारी देने का भी निर्देश दिया था। इसके बाद जनहित याचिका का निपटारा कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने प्रदूषण संबंधी आरोपों पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं सुनाया था।
ऐसे में तालाब में गंदे पानी का प्रवाह जारी रहने की खबरों ने यह सवाल खड़ा किया है कि अदालत के निर्देश के बाद मनपा ने क्या कदम उठाए और अब तक समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पाया।
पहले भी सामने आ चुका है प्रदूषण का मामला
19 अप्रैल को तालाब की स्थिति की पड़ताल के दौरान गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पीछे से प्लास्टिक और घरेलू कचरे से युक्त बदबूदार पानी की धारा बहती हुई मिली थी। यह पानी कटोल रोड के नीचे बने पुलिया मार्ग से होकर झील की ओर जा रहा था।
इसके तीन दिन बाद सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 में मनपा ने गोरेवाड़ा तालाब से 9,300 मिलियन लीटर से अधिक पानी निकाला था, जबकि प्रयोगशाला जांच में बैक्टीरियोलॉजिकल प्रदूषण के संकेत मिले थे। नवंबर 2025 में मनपा की केंद्रीय जल परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पानी में कुल कोलीफॉर्म का स्तर 350 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर और ई. कोलाई का स्तर 22 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया था। ये निष्कर्ष पानी की गुणवत्ता और संभावित मलजनित प्रदूषण को लेकर चिंता पैदा करते हैं।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता पर भी सवाल:
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के अधिकारियों के साथ किए गए संयुक्त निरीक्षण में दाभा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भी खामियां सामने आने की जानकारी दी गई थी। इस संयंत्र की निर्धारित क्षमता प्रतिदिन 5 मिलियन लीटर (एमएलडी) थी, लेकिन निरीक्षण के समय यह लगभग 2 एमएलडी पानी ही उपचारित कर रहा था।
इसके बाद मनपा ने ड्रोन सर्वेक्षण कराने और पानी के नए नमूनों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इन कदमों के बाद प्रदूषण के स्रोत की पहचान, सुधारात्मक कार्रवाई और पानी की मौजूदा गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
जलसंकट के बीच बढ़ी चिंता:
तोतलाडोह बांध का जलस्तर 50 प्रतिशत से नीचे रहने की स्थिति में गोरेवाड़ा तालाब जैसे वैकल्पिक जलस्रोतों का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में तालाब में सीवेज और कचरे का प्रवेश रोकना, प्रदूषण के स्रोत का स्थायी समाधान करना तथा जलापूर्ति से पहले पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है। बार-बार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब मनपा की कार्रवाई और तालाब के पानी की ताजा जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी।








