जामसांवली १८ : मां नर्मदा के परम भक्त एवं उनके अमृत जल पर वर्षों से निराहार तपस्या कर रहे पूज्य अवधूत संत श्री दादा गुरु जी ने जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जामसांवली स्थित चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर (हनुमान लोक) में पधारकर श्री मूर्ति के दर्शन किए एवं पूजा-अर्चना संपन्न की।
पूज्य दादा गुरु जी की तपस्या, उनका प्रकृति प्रेम एवं समाज को दिए गए संदेश आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इस अवसर पर उन्होंने श्री मूर्ति के समक्ष बैठकर उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री रामचरितमानस की महिमा का वर्णन कर समाज और राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना तथा “एक पेड़ माँ के नाम” का संदेश दिया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़ , मंदिर संस्थान के संरक्षक दादाराव बोबडे , अध्यक्ष गोपाल शर्मा , उपाध्यक्ष संतोष डवरे जी, ट्रस्टी एवं जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड़, ट्रस्टीगण नितिन मोहगावकर , अजय धवले, मनोहर शेलकी , मोहन ताजने, भास्कर गुढ़दे , नीलेश खंडाईत सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे तथा पूज्य दादा गुरु जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर संस्थान की ओर से पूज्य अवधूत संत श्री दादा गुरु जी का सम्मान करते हुए उन्हें श्री हनुमान जी की प्रतिकृति भेंट की गई।
पूज्य श्री दादा गुरु का परिचय
तपस्वी संत पूज्य श्री दादा गुरु पिछले 4 साल 10 महीने से केवल नर्मदा जल पर आश्रित है। तब से उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। दिन भर में केवल 1 लीटर नर्मदा जल ही पीते हैं। इसके बाद भी ना तो उन्हें कमजोरी आई है ना थकावट होती है।
देश दुनिया के वे एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने प्रकृति, धरा, धेनु, जीवनदायिनी पवित्र नदियों के साथ मां नर्मदा पर ही अपना सब कुछ केंद्रित कर दिया है।
नर्मदा मिशन के माध्यम से मां नर्मदा की स्वच्छता पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने और नर्मदा के तटीय इलाकों में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार निराहार महाव्रत साधना कर रहे हैं। दादागुरु ने डेढ़ लाख किमी की निराहार यात्रा और नर्मदा परिक्रमा की है।




