– पोक्सो मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी को दी अग्रिम जमानत
नागपुर :- जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश जे.सी.यादव ने एक दुष्कर्म एवं पोक्सो अधिनियम से संबंधित प्रकरण में आरोपी ऋषिक पवार को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए नाबालिग की सहमति के कानूनी प्रभाव पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
मामले के अनुसार, पीड़िता की पहचान आरोपी से इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हुए और बाद में उनके बीच शारीरिक संबंध बने। उस समय पीड़िता की आयु लगभग 17 वर्ष थी। अभियोजन के अनुसार, चूंकि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति को विधि सम्मत सहमति नहीं माना जा सकता और इसी आधार पर आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (या तत्कालीन लागू कानून) तथा पोक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता वासुदेव कापसे ने यह तर्क रखा कि मामले की परिस्थितियों एवं उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में विशाल अवघडे बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र (वर्ष 2024) के निर्णय का भी हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने उक्त निर्णय का संदर्भ लेते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की। आरोपी की ओर से अधिवक्ता वासुदेव कापसे ने पैरवी की, जबकि उन्हें अधिवक्ता शुभम धवने एवं अधिवक्ता पंकज समुद्रे ने सहयोग प्रदान किया।





