– वर्षों से कागजी कार्रवाई में उलझी क्राउन सोसाइटी, बोरवेल के भरोसे 260 प्लॉट धारक
नागपुर :- मनपा सीमा के बाहर विकास का दायरा लगातार बढ़ने के बावजूद कई आवासीय क्षेत्रों के नागरिक आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। वर्धा रोड स्थित चिंचभवन की क्राउन सोसाइटी इसका उदाहरण है। वर्ष 1992 में पंजीकृत और 2003 में स्वीकृत इस सोसाइटी में करीब 260 प्लॉट हैं। आरएल मिलने के बाद अधिकांश प्लॉटों पर मकान बन गए और लोग रहने भी लगे, लेकिन अब तक पीने के पानी और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
विडंबना यह है कि सोसाइटी की जमीन पर ही पानी की टंकियां बनाई गई हैं और इनसे आसपास की अन्य सोसाइटियों में पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन क्राउन सोसाइटी के नागरिक इससे वंचित हैं। पानी के लिए उन्हें पूरी तरह बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सोसाइटी की सड़कें भी जर्जर हैं और अधिकांश रास्ते कच्चे हैं। बारिश के दिनों में कीचड़ के कारण आवाजाही और मुश्किल हो जाती है।

गलत जगह पानी की टंकी बनाने का आरोप
निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी में पानी की टंकी गलत स्थान पर बना दी गई, जिससे एप्रोच रोड बाधित हो गया। इसके चलते कई प्लॉट धारक अपने प्लॉट पर मकान नहीं बना पा रहे हैं। प्लॉट धारकों के अनुसार, उपलब्ध दूसरी जगह से एप्रोच रोड बनाने के लिए वे वर्षों से एनआईटी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक केवल कागजी कार्रवाई ही हुई है।नागरिकों ने यह मुद्दा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के जनता दरबार में भी कई बार उठाया। उनके अनुसार, अधिकारियों को 3-4 बार निर्देश दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सोसाइटी पदाधिकारियों से जवाब न मिलने का दावा
नासुप्र की ओर से बताया गया कि सोसाइटी के पदाधिकारियों से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। वहीं, नागरिकों का कहना है कि सोसाइटी वर्ष 1992 में पंजीकृत हुई थी और उस समय के पदाधिकारियों का अब कोई अता-पता नहीं है।
प्लॉटधारकों की ओर से आगे की कार्रवाई के लिए संशोधित नक्शा मंजूरी हेतु एनआईटी में जमा किया गया है। संजय फितरे, सुरेश उघाड़े सहित अन्य प्लॉटधारकों ने संशोधित नक्शे को जल्द मंजूरी देकर सोसाइटी में सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।





