– आरएएस के स्वयंसेवकों में भी असंतोष
नागपुर :- आगामी नागपुर मनपा चुनावों के मद्देनजर, उम्मीदवारों के बंटवारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष अब खुले विद्रोह में तब्दील हो गया है. गौरतलब है कि इन घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों में भी असंतोष पैदा कर दिया है, जो राजनीति से दूर रहने की परंपरा निभाते आए हैं. कुछ स्थानों पर तो संघ से जुड़े कार्यकर्ता सीधे चुनाव मैदान में उतर आए हैं. इससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं और नागपुर की राजनीति में एक नया समीकरण आकार ले रहा है.
भाजपा ने महल प्रभाग 18 से बंडू राउत को आधिकारिक उम्मीदवार बना दिया है. हालांकि, आरएसएस स्वयंसेवक धीरज चव्हाण द्वारा इसी प्रभाग से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे के फैसले के बाद पार्टी मुश्किल में फंस गई है. गौरतलब है कि शुरुआत में भाजपा ने बंडू राउत और धीरज चव्हाण दोनों को एबी फॉर्म दिया था. लेकिन अंतिम चरण में राउत की उम्मीदवारी की पुष्टि होने के बाद चव्हाण ने अपना नाम वापस लेने से साफ इनकार कर दिया. नतीजतन, महल में पारंपरिक तीन-तरफ़ा मुकाबले के बजाय चार-तरफा मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं.
प्रभाग नंबर 22 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है और परंपरागत रूप से भाजपा के लिए सुरक्षित वार्ड माना जाता है. संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, जिनमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भगवत भी शामिल हैं, यहां के मतदाता हैं, इसलिए पूरे राज्य की निगाहें इस प्रभाग पर टिकी हैं. हालांकि, इस साल इसी संघभूमि से दलीय राजनीति के खिलाफ एक नई आवाज उभर रही है.
इस प्रभाग में संघ से जुड़े निनाद दीक्षित और मुकुंद बापट ने भी चुनाव मैदान में कदम रखा है. निनाद दीक्षित किसी भी प्रमुख पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि एक नागरिक समिति के माध्यम से चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि वे संघ से आधिकारिक समर्थन का दावा नहीं करते, लेकिन उनका कहना है कि संघ से जुड़े कई स्वयंसेवक व्यक्तिगत स्तर पर उनसे सहमत हैं.
दीक्षित के अनुसार, यह लड़ाई किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था की निष्क्रियता के खिलाफ है. उनका कहना है कि युवाओं को राजनीति में अवसर न मिलने के कारण नेतृत्व का अभाव पैदा हो रहा है. उनका यह भी कहना है कि कॉलेज चुनावों के स्थगित होने से युवाओं के राजनीतिक गठन में बाधा आ रही है.








