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बाघ टी-98 की सांसें थमीं, हाईवे पर तेंदुआ खत्म

– पेंच में 24 घंटे में दो वन्यजीवों की मौत से वन विभाग में हड़कंप

पेंच टाइगर रिजर्व और उससे सटे क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर दो बड़े वन्यजीवों की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। एक ओर चर्चित नर बाघ टी-98 ने उपचार और निगरानी के बावजूद दम तोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग पार करते समय एक तेंदुआ अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों मामलों की जांच वन विभाग ने शुरू कर दी है।

पहली घटना पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली वन परिक्षेत्र से सटे रामटेक वन परिक्षेत्र के मौजा खुमारी की है। सोमवार को गश्त के दौरान वन कर्मचारियों को चर्चित नर बाघ टी-98 एक खेत में अत्यंत कमजोर अवस्था में मिला। सूचना मिलते ही चोरबाहुली वन परिक्षेत्र अधिकारी जयेश तायडे और रामटेक वन परिक्षेत्र अधिकारी राहुल शिंदे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बाघ की लगातार निगरानी और उपचार के प्रयास किए गए, लेकिन मंगलवार दोपहर करीब 12.30 बजे उसकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही सहायक वन संरक्षक पूजा लिंबगांवकर, सहायक वन संरक्षक गोविंद लूचे तथा अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। पंचनामा कर शव को नागपुर स्थित टीटीसी भेजा गया, जहां उपवनसंरक्षक डॉ. विनिता व्यास की मौजूदगी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पोस्टमार्टम और अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई। वन विभाग के अनुसार बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

इसी दौरान मंगलवार तड़के शीतलवाड़ी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर रहे एक तेंदुए की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, पंचनामा कर शव को कब्जे में लिया और पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है तथा दुर्घटना के लिए जिम्मेदार अज्ञात वाहन की तलाश जारी है।

यह कार्रवाई पेंच टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अक्षय गजभिए के मार्गदर्शन में की गई। वन विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के वन क्षेत्रों से गुजरते समय विशेषकर रात में निर्धारित गति सीमा का पालन करें और सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं, क्योंकि इन क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

एक ही दिन में एक चर्चित बाघ और एक तेंदुए की मौत ने वन्यजीव संरक्षण और वन क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाघ की मौत के कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट के बाद होगा, जबकि तेंदुए की मौत ने हाईवे पर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर और वाहनों की गति नियंत्रण की आवश्यकता को फिर उजागर कर दिया है।


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