– कुछ ही वर्षों में बढ़कर करोड़ों रुपये हो गए
नासिक :- सीबीआई ने 2012 बैच के अधिकारी और देवलाली छावनी बोर्ड के पूर्व सीईओ, अजय कुमार के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। जिस अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत में केवल ₹52,000 की संपत्ति घोषित की थी, उसकी संपत्ति कुछ ही वर्षों में बढ़कर करोड़ों रुपये हो गई। इस संदिग्ध बढ़ोतरी ने सीबीआई का ध्यान खींचा और अब इस मामले की विस्तृत जांच चल रही है।
सीबीआई की जांच में न केवल अधिकारी की संपत्ति, बल्कि उनके वित्तीय लेन-देन और परिवार के सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल की गई है। एजेंसी का आरोप है कि अजय कुमार अपनी आय के अनुपात में अपनी संपत्ति का संतोषजनक हिसाब देने में विफल रहे। नतीजतन, उनकी पत्नी और मां को भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है और इस मामले को भ्रष्टाचार के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा र हा है।
अजय कुमार की संपत्ति की जांच 1 जनवरी, 2014 से 13 जून, 2024 की अवधि के लिए की गई। जांच की अवधि की शुरुआत में, उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹52,428 थी। हालांकि, दस वर्षों के भीतर, उनकी संपत्ति बढ़कर ₹5.59 करोड़ हो गई। इसी अवधि के दौरान, उन्होंने ₹5.17 करोड़ का खर्च भी किया। सीबीआई की जांच में उनकी वैध आय को देखते हुए इतनी बड़ी संपत्ति का कोई स्पष्ट आधार नहीं मिला। जबकि वे अपनी आय के आधार पर कानूनी रूप से ₹13.64 लाख बचा सकते थे, उनके पास लगभग ₹5.72 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति पाई गई। अधिकारी इस संपत्ति के स्रोतों के बारे में संतोषजनक दस्तावेज या स्पष्टीकरण देने में विफल रहे। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
आगे की जांच जारी
सीबीआई का आरोप है कि अजय कुमार की पत्नी, स्मिता कुमारी और उनकी मां, निर्मला देवी ने उनकी संपत्ति और धन के प्रबंधन में उनकी मदद की। कथित तौर पर इन दोनों ने विभिन्न तरीकों से अवैध धन को छिपाने और प्रबंधित करने में भूमिका निभाई। नतीजतन, उन्हें मामले में सह-आरोपी बनाया गया है। जांच चल रही है और अंतिम नतीजे अदालती कार्यवाही के बाद ही सामने आएंगे।








