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मुख्य न्यायाधीश पर ‘जूता फेंकने’ के मामले ने अकोला में मचाया बवाल

– काले झंडे दिखाकर किया जोरदार विरोध प्रदर्शन 

अकोला :- सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने के मामले को लेकर अकोला में कड़ा विरोध जताया गया है। एनसीपी के शरद पवार गुट ने सोमवार शाम बस स्टेशन चौक पर काले झंडे दिखाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। देश के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की एक चौंकाने वाली घटना सोमवार सुबह सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस समय मुख्य न्यायाधीश एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। 60 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने ऐसा किया। सुरक्षा गार्डों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया। इस दौरान आरोपी नारे लगा रहा था और कह रहा था, ‘भारत सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।

घटना के समय आरोपी भारत में सनातन धर्म के अपमान को लेकर नारेबाजी कर रहा था। उसने जोर से कहा, “भारत सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।” इस अप्रत्याशित हरकत के बाद सुरक्षा गार्डों ने तुरंत उसे पकड़ लिया और कोर्ट से बाहर ले जाया गया।

इस घटना की खबर फैलते ही महाराष्ट्र के अकोला जिले में इसका तीव्र विरोध देखने को मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट ने शाम को बस स्टेशन चौक पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में काले झंडे लेकर घटना के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और इस हरकत को लोकतंत्र और न्यायपालिका का अपमान बताया। यह न केवल सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है, बल्कि यह लोकतंत्र के मूल मूल्यों के खिलाफ भी है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाए। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर हमला न केवल एक व्यक्ति विशेष पर, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र की नींव पर एक सीधा हमला माना जा रहा है। यह जरूरी है कि इस तरह की घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई हो और देश की सबसे बड़ी अदालत की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाए।

लोकतंत्र और न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल

यह घटना सिर्फ एक अदालत कक्ष तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे देश में न्यायपालिका की सुरक्षा और सम्मान को लेकर चिंता खड़ी कर दी है। जिस तरह से एक वकील ने कोर्ट के भीतर इस तरह का व्यवहार किया, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अदालतों में सुरक्षा पर्याप्त है? क्या इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करेंगी? क्या यह लोकतंत्र की सहिष्णुता पर हमला है?

फिलहाल आरोपी राकेश किशोर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके मानसिक स्वास्थ्य की भी जांच की संभावना जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उच्चस्तरीय बैठक बुलाए जाने की खबरें हैं।

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