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माझी लड़की बहन’ योजना से राज्य का बजट चरमराया

 – छगन भुजबल का कबूलनामा

मुंबई :- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने सोमवार को स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना और बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली सहायता के कारण राज्य की वित्तीय योजनाएँ चरमरा गई हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्याप्त धन की कमी के कारण इस वर्ष ‘आनंदचा शिधा’ योजना लागू नहीं की जाएगी। भुजबल ने कहा कि चूँकि मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना पर सालाना 40,000 से 45,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसलिए स्वाभाविक है कि इसका असर अन्य विभागों के वित्तीय प्रावधानों पर भी पड़ेगा। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना’ और बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत पैकेज के चलते राज्य की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव आ गया है। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने यह खुलकर स्वीकार किया कि फंड की कमी के कारण इस साल ‘आनंदचा शिधा’ योजना को लागू नहीं किया जाएगा।

‘आनंदचा शिधा’ योजना एक सामाजिक योजना है, जिसके तहत त्योहारों के अवसर पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन और आवश्यक वस्तुओं की एक विशेष किट वितरित की जाती है। यह योजना विशेष रूप से गणेश उत्सव और अन्य प्रमुख पर्वों के समय लागू की जाती है, जिससे हजारों परिवारों को कुछ राहत मिलती है। पिछले वर्षों में इस योजना के जरिए लाभार्थियों को तेल, चावल, दाल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री कम कीमत या निःशुल्क दी जाती थी।

छगन भुजबल ने बताया कि मुख्यमंत्री एक नई योजना — ‘माझी लड़की बहन योजना’ — के तहत लड़कियों और महिलाओं के उत्थान के लिए सालाना ₹40,000 से ₹45,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। यह एक महत्वाकांक्षी सामाजिक कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इतना बड़ा वित्तीय भार उठाने के बाद अन्य योजनाओं को चलाना कठिन हो गया है। राज्य के पास सीमित संसाधन हैं, और प्राथमिकता तय करनी पड़ती है।

इस साल महाराष्ट्र के कई हिस्सों में असाधारण बारिश और बाढ़ की वजह से हजारों किसान और नागरिक प्रभावित हुए हैं। सरकार को बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता के लिए भी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी है। इस वजह से अन्य विभागों के बजट में कटौती करनी पड़ी। छगन भुजबल के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि सरकार को योजनाओं की संतुलित योजना बनानी चाहिए थी। एक योजना के कारण दूसरी योजनाओं को रद्द करना गरीबों के साथ अन्याय है।

‘आनंदचा शिधा’ जैसी जनहित की योजनाएं त्योहारी सीजन में गरीबों के लिए राहत का बड़ा स्रोत थीं।

सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि सरकार को वैकल्पिक स्रोत तलाश कर ‘आनंदचा शिधा’ जैसी योजना को जारी रखना चाहिए। छगन भुजबल का यह कबूलनामा राज्य की आर्थिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। जहां ‘माझी लड़की बहन योजना’ समाज के एक वर्ग के लिए वरदान साबित हो सकती है, वहीं इसके चलते अन्य योजनाओं का बंद होना सामाजिक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों पर प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार वित्तीय संतुलन कैसे साधती है और सभी वर्गों को राहत देने के लिए कौन-से नए कदम उठाती है।

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