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बाल मजदूर प्रतिबंधक कानून की उड़ीं धज्जियां

– नागपुर व चंद्रपुर जिले में सर्वाधिक बाल कामगार

नागपुर :- उम्र के 14 साल तक बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है। विदर्भ में बाल मजदूर प्रतिबंधक कानून की धज्जियां उड़ाकर नाबालिगों से काम कराया जा रहा है। कामगार विभाग ने सालभर में नागपुर विभाग के 41 स्थलों पर छापे मारे। इस दौरान 66 बाल मजदूरों को मेहनती काम से मुक्त किया गया। नागपुर और चंद्रपुर जिले में सबसे ज्यादा 28 स्थानों पर छापामार कार्रवाई कर 51 बाल मजदूरों की मुक्त कराने की जानकारी सामने आई है। विदर्भ में नागपुर और चंद्रपुर जिला अन्य जिलों के मुकाबले औद्योगिक क्षेत्र में आगे है। गांवों में रोजगार नहीं मिलने से अनेक परिवार शहरों का रुख कर रहे हैं। शहर में आने पर जैसे-तैसे रोजगार तो मिल जाता है पर गांव के मुकाबले खर्च ज्यादा आता है। परिवार का खर्च पूरा करने के लिए पैसा कम पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चों से भी करवाई जाती है। स्कूल जाने की उम्र में बच्चों से मजदूरी करवाना गैरकानूनी और समाज के लिए चिंताजनक भी है। बाल अधिकार कानून के अनुसार नाबालिगों से काम करवाना गुनाह तो है ही, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा साधनों के बिना जान जोखिम में डालकर काम कराए जाने की कामगार विभाग के छापे में चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। कुछ जगह ओवर टाइम में नाम पर देर रात तक काम करवाने का खुलासा हुआ है। अपर कामगार आयुक्त के दस्ते ने ऐसे स्थानों पर छापे मारकर संबंधित आस्थापना पर गुनाह दर्ज किए हैं। उनके खिलाफ फौजदारी कार्रवाई की जाने वाली है।

नागपुर : 34

भंडारा : 05

गोंदिया : 04

चंद्रपुर : 17

वर्धा : 04

गडचिरोली : 02

कम पैसे में कराए जा रहे काम

शहर में रोजगार के लिए स्थलांतरित परिवार के बच्चे कम मजदूरी में मिल जाते हैं। उद्योजक तथा व्यावसायिक मौके का फायदा उठाकर 100-150 रुपए में दिनभर काम करा रहे हैं। बाल मजदूरों में अधिकांश सीमावर्ती राज्यों के बच्चें बताए जाते हैं। बाल मजदूरों में रोजगार के लिए शहर में स्थलांतरित परिवार अथवा व्यावसायिकों ने अन्य राज्यों से कम मजदूरी में लाए बच्चों का समावेश है।

बाल मजदूरी कराने वालों पर गुनाह दर्ज

बाल कामगार प्रतिबंधक कानून के तहत 14 साल तक बालकों से श्रम कराना कानून गुनाह है। कामगार विभाग ने विविध स्थानों पर छापे मारकर बाल मजदूरों से काम कराने वालों पर गुनाह दर्ज किए हैं। कोई भी आस्थापना बाल मजदूरों को काम पर न रखें। जो आस्थापना नियम का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ गुनाह दर्ज किए जाएंगे।

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