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शहरवासी प्रतिदिन खींच रहे ढाई सिगरेट के बराबर धुआं

– जहरीली हुई हवा

 नागपुर :- यदि आप धूम्रपान फरते, तो इसका मतलब यह नहीं आपके फेफड़े सुरक्षित है. नागपुर यहां के निवासी अनजाने में आज इतनी प्रदूषित हो गई जहरीला धुआं फेफड़ों में खींच रहे लगभग ढाई सिगरेट के 2020 से वायु गुणवत्ता में गिरावट केवल आंकडे नहीं है, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट है.

वार्षिक औसत नहीं 47 पर पहुंच गया है 2020 की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूलाई) कि तुलना में इसमें 40.5 की बड़ी की गिरावट हुई है विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रतिदिन अनुसार ‘पीएम 2.5 स्तर 10-12 कस्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों के हैं. चाहिए. हालांकि, नागपुर का स्तर बराबर माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता यह सूक्ष्म कण नाक के रास्ते सीधे इस सीमा से 6.8 गुना अधिक है. ये मंडराता फेफड़ों में गहराई तक जाकर रक्त व्यक्ति को सावधानी बरतने और प्रवाह में मिल जाते हैं. ऐसे में प्रत्येक उपाय करने की आवश्यकता है.

नागपुर का ‘एक्यूआई’ दोपहर में 95 होता है, लेकिन रात और सुबह यह 173 तक चला जाता है. यानी कि सुरक्षित सीमा से यह तिगुना अधिक है. सर्दियों में ठंडी हवा के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही फंसे रहते हैं, जिससे सुबह व्यायाम के लिए बाहर निकलने वालों को सबसे अधिक खतरा होता है.

‘क्रिम्स’ अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार खांसी, छाती में जकड़न और सांस फूलने की शिकायत वाले मरीजों में 15-20 प्रतिशत वृद्धि हुई है. इसमें सबसे अधिक परेशानी दमा और ‘सीओपीडी’ के रोगियों को हो रही है. प्रदूषण के कारण | उनकी बीमारियां बढ़ रही हैं.

डॉ. अरबट ने कहा कि घर से बाहर निकलते समय ‘एन 95’ या ‘एन 99’ मास्क पहनें. सुबह 7 से 10 और शाम 6 से 9 के बीच जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है, तब घर से बाहर जाने से बचें. शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए आंवला, हल्दी, नींबू और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें.

नागपुर की हवा अब गंभीर होती जा रही है. ‘पीएम 2.5’ ये सूक्ष्म कण फेफड़ों के आखिरी छोर तक पहुंच कर स्थायी सूजन और श्वास कष्ट के प्रकार पैदा करते हैं. यह केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक आपातकाल है. यदि अब सावधान नहीं हुए, तो अगली पीढ़ी के फेफड़े जन्म से ही कमजोर होंगे.

विकसित होते फेफड़ों पर स्थायी प्रभाव पड़ने से कम उम्र में ही दमा और कान में दर्द की समस्याएं शुरु हो रही हैं. कम रोगप्रतिरोधक क्षमता के कारण मध्यम प्रदूषण में भी वृद्ध व्यक्तियों को हृदय रोग और श्वसन के गंभीर झटके आ सकते हैं.

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