Home Latest News आयुर्वेदीय विष चिकित्सा का वैज्ञानिक मानदंडों पर विकास आवश्यक है

आयुर्वेदीय विष चिकित्सा का वैज्ञानिक मानदंडों पर विकास आवश्यक है

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<p><strong>&&num;8211&semi; राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं के विचार<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p><strong>नागपुर &colon;- <&sol;strong>श्री आयुर्वेद महाविद्यालय में पंडित रामनारायण शर्मा स्मृति में &&num;8216&semi;आयुर्वेदोमृतनाम&&num;8217&semi; दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समूह चर्चा सत्र में अगद तंत्र के विशेषज्ञों ने आयुर्वेद विष चिकित्सा के वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर विकास की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान शिक्षण&comma; प्रशिक्षण की एकरूपता जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;<p>संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ&period; गोविंद प्रसाद उपाध्याय ने की। प्रमुख अतिथि बैद्यनाथ के अध्यक्ष प्रणव शर्मा ने संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्रों की उत्कृष्टता की सराहना करते हुए ऐसी संगोष्ठियों का पुनः पुनः आयोजन को समय की आवश्यकता बताई। स्वदेशी चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग के सदस्य डॉ&period; अतुल बाबू वार्ष्णेय ने छात्रों के लिए उत्तम व्यवहारिक प्रशिक्षण पद्धति के विकास पर जोर दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तकनीकी सलाहकार डॉ&period; पवन कुमार ने अभूतपूर्व आयोजन की सफलता पर संस्था को बधाई दी।<&sol;p>&NewLine;<p>प्रातः कालीन कार्यशालाओं में जलगांव के वैद्य उदय तल्हा ने विभिन्न रोगों पर अग्निकर्म का एवं पुणे से पधारी डॉक्टर नीता काला ने विद्ध कर्म का रोगियों पर उपचारात्मक प्रयोग के प्रात्यक्षिक दिखाए।<&sol;p>&NewLine;<p>मंच पर भारतीय वैद्यक समन्वय समिति के कार्यकारी सदस्य डॉ रामकृष्ण छागांणी&comma;डॉ संतोष शर्मा&comma; विद्यापीठ पर्यवेक्षक डॉ&period; मनोज निंबालकर&comma; प्राचार्य डॉ&period; बृजेश मिश्रा&comma; उप प्राचार्य मृत्युंजय शर्मा&comma; आयोजन सचिव डॉ&period; अश्विन निगम उपस्थित थे।कार्यक्रम संचालन डॉ&period; गायत्री व्यास ने एवं आभार प्रदर्शन डॉ&period; मेधश्याम अंजनकर ने किया।<&sol;p>&NewLine;

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