– कांग्रेस पार्षदों ने प्रशासन को घेरा, विकास कार्यों में देरी और अव्यवस्था का लगाया आरोप
नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका मुख्यालय में आयोजित स्थायी समिति की बैठक में ई-कार्यालय प्रणाली के क्रियान्वयन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षदों ने प्रशासन पर डिजिटल व्यवस्था को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे विकास कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है और जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कांग्रेस पार्षद अभिजीत झा ने बैठक में कहा कि ई-कार्यालय प्रणाली संभालने के लिए अधिकांश कर्मचारी प्रशिक्षित नहीं हैं। इससे प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष के छह महीने बीत जाने के बावजूद कई प्रभागों में बुनियादी विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं, जिसके कारण पार्षदों को नागरिकों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मनपा आयुक्त ने 1 अगस्त से ई-कार्यालय प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई अपर आयुक्त अब भी मैन्युअल रूप से तैयार फाइलें वापस लौटा रहे हैं। ऐसे में पहले से पूरी हो चुकी प्रक्रिया को दोबारा डिजिटल प्रणाली में दर्ज करना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी हो रही है।पार्षदों का कहना था कि कई मामलों में जांच, बजट प्रावधान, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक मंजूरी और निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद ई-कार्यालय के नाम पर पूरी प्रक्रिया दोबारा करने से विकास कार्य और अधिक विलंबित होंगे।
गणवेश खरीदने का संशोधित प्रस्ताव पेश करें
बैठक में मनपा स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए दो-दो जोड़ी गणवेश खरीदने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। प्रति छात्र 600 रुपये की दर से 4,279 विद्यार्थियों के लिए 25.67 लाख रुपये के प्रस्ताव पर समिति ने पुनर्विचार करने का निर्णय लिया। स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दानी-वखरे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव देर से प्रस्तुत करने पर फटकार लगाई और अगली बैठक में संशोधित प्रस्ताव पेश करने के निर्देश दिए।
इस दौरान मनपा की डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए 23.60 लाख रुपये की लागत से साइबर सुरक्षा ऑडिट (सिक्योरिटी ऑडिट) कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में बताया गया कि इससे पहले मनपा की वेबसाइट पर कई बार साइबर हमले हो चुके हैं। बैठक के अंत में कांग्रेस पार्षदों ने ई-कार्यालय प्रणाली के क्रियान्वयन में सामने आई कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।





