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डिजिटल व्यवस्था के सामने बुजुर्ग किसान बेबस

– परिजनों ने लगाई प्रशासन से गुहार

अमरावती :-  जिला मुख्यालय अमरावती से निकट स्थित भातकुली तहसील में उम्रदराज होने के कारण अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आने से 100 वर्षीय किसान शंकरराव तुकाराम काले के सामने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से वंचित रहने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनकी कृषि भूमि चुनकी क्षेत्र में स्थित है, लेकिन अंगूठे के निशान स्पष्ट न होने के कारण उनकी ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है। इसके चलते उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। परिजनों के अनुसार इस संबंध में कई बार जिला कृषि अधिकारी कार्यालय, अमरावती में शिकायत की गई, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका है। वृद्धावस्था और खराब स्वास्थ्य के कारण वे स्वयं कार्यालयों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। ऐसे में प्रशासन से मांग की जा रही है कि बुजुर्ग किसानों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए तथा कृषि विभाग के अधिकारी या कर्मचारी उनके घर पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। शासन के निर्देशानुसार वरिष्ठ नागरिकों के घर जाकर ई-केवाईसी करने की व्यवस्था है तथा 30 जून तक यह प्रक्रिया पूर्ण करने के आदेश दिए गए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित कृषि अधिकारी शंकरराव काले के घर पहुंचकर उनकी ई-केवाईसी पूरी करें, ताकि उन्हें संबंधित शासकीय सहायता का लाभ मिल सके। स्थानीय नागरिकों ने प्रश्न उठाया है कि क्या प्रशासन इस 100 वर्षीय किसान की समस्या का समाधान कर उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में सफल होगा।

अमरावती : देश के किसानों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए जहां डिजिटल प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया गया है, वहीं यही व्यवस्था अब कुछ बुजुर्ग किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अमरावती जिले की भातकुली तहसील के 100 वर्षीय किसान शंकरराव तुकाराम काले इसी समस्या से जूझ रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुके शंकरराव काले को केवल इसलिए योजना का लाभ मिलने में अड़चन आ रही है क्योंकि उनके अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आ रहे हैं और ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।

जानकारी के अनुसार शंकरराव काले की कृषि भूमि चुनकी क्षेत्र में स्थित है और वे वर्षों से खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए भी महत्वपूर्ण है, लेकिन डिजिटल सत्यापन की अनिवार्यता उनके सामने बड़ी बाधा बन गई है। उम्र बढ़ने के साथ उनके अंगूठे की रेखाएं धुंधली हो चुकी हैं, जिसके कारण बायोमेट्रिक मशीनें उनकी पहचान दर्ज नहीं कर पा रही हैं।

केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं में पारदर्शिता और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य किया गया है। हालांकि, शंकरराव काले जैसे वरिष्ठ नागरिक किसानों के मामले में यही नियम समस्या बनता दिखाई दे रहा है। कई बार प्रयास करने के बावजूद बायोमेट्रिक सत्यापन सफल नहीं हो सका, जिसके चलते उनकी किसान सम्मान निधि की किस्तें अटकने की आशंका बढ़ गई है। काले परिवार ने प्रशासन और संबंधित विभाग से विशेष व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि शंकरराव काले जैसे बुजुर्ग किसानों के लिए वैकल्पिक पहचान सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे केवल तकनीकी कारणों से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।

कई बुजुर्ग किसानों की समान समस्या

कृषि और राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार यह समस्या केवल एक किसान तक सीमित नहीं है। जिले में अनेक वरिष्ठ नागरिक किसानों को बायोमेट्रिक सत्यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उम्र बढ़ने के कारण उंगलियों और अंगूठों के निशान हल्के पड़ जाने से ई-केवाईसी प्रक्रिया प्रभावित होती है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में आधार आधारित ओटीपी, फेस ऑथेंटिकेशन या अन्य वैकल्पिक सत्यापन प्रणाली लागू की जाए, ताकि पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

100 वर्ष की उम्र में भी खेती से जुड़ा किसान आज सरकारी मदद पाने के लिए तकनीकी बाधाओं से संघर्ष कर रहा है। सवाल यह है कि क्या डिजिटल व्यवस्था इतनी लचीली होगी कि वह ऐसे वरिष्ठ किसानों के अधिकारों की रक्षा कर सके?

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