– सरपंच व उपसरपंच को मिली राहत
नागपुर :- बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी व्यक्ति के प्रति किया गया हर अपमान या धमकी अपने-आप में अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। यह तभी अपराध बनता है, जब ऐसा कृत्य पीड़ित के अनुसूचित जाति या जनजाति से होने के कारण किया गया हो। इस अहम टिप्पणी के साथ ही न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके ने भंडारा जिले की मांगली ग्राम पंचायत के सरपंच भोजराज मेघश्याम वैद्य और उपसरपंच हिरालाल दादाजी वैद्य के खिलाफ दर्ज अपराध को रद्द कर दिया। दोनों के खिलाफ विमल खोब्रागडे ने धमकाने, जातिसूचक गाली देने का आरोप में केस दर्ज कराया था। अदालत ने पाया कि घटना शिकायतकर्ता के घर के भीतर हुई बताई गई है, जो न तो सार्वजनिक स्थान पर हुई है, न ही इसका कोई स्वतंत्र गवाह है। सभी गवाह शिकायतकर्ता के रिश्तेदार हैं। अदालत ने माना कि इस्तेमाल की गई कथित भाषा कानून की दृष्टि से अश्लील नहीं ठहरती और उससे जातिगत अपमान का स्पष्ट उद्देश्य भी सिद्ध नहीं होता।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी प्रथमदृष्ट्या अपराध सिद्ध नहीं होता। इसलिए, दर्ज अपराध तथा विशेष मुकदमे को रद्द करने का आदेश दिया।




