– हितेश बंसोड़ ने कंधा देकर निभाया इंसानियत का धर्म, बेटे प्रहार ने दी मुखाग्नि
नागपुर/सावनेर :- जीवनभर का सफर तय करने के बाद जब किसी इंसान की आंखें हमेशा के लिए बंद हो जाएं और उसे अंतिम विदाई देने के लिए अपना कोई भी मौजूद न हो, तो इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो। रिश्तों की इस दुनिया में अपनों का साथ छूट जाने के बाद मौत भी अगर अकेलेपन के साए में आए, तो उस पीड़ा की कल्पना करना मुश्किल है। लेकिन ऐसे ही मुश्किल वक्त में जब कोई अनजान व्यक्ति अपनेपन का हाथ बढ़ाता है, तो इंसानियत पर भरोसा और गहरा हो जाता है। खापरखेड़ा में 80 वर्षीय बेसहारा सावित्रीबाई टेकाम के निधन के बाद समाजसेवी हितेश बंसोड़ ने कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया। उन्होंने न केवल वृद्धा के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि उनके बेटे प्रहार हितेश बंसोड़ ने मुखाग्नि देकर उन्हें भावभीनी अंतिम विदाई दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर गया और समाज को यह संदेश दे गया कि इंसानियत का रिश्ता खून के रिश्तों का मोहताज नहीं होता।
24 अक्टूबर को खापरखेड़ा के युवा समाजसेवी मयूर तिरपुड़े ने हितेश बंसोड़ को फोन कर एक बेसहारा वृद्धा के निधन की जानकारी दी। बताया गया कि डॉ. केलवदे के पास इलाज के लिए आई वृद्धा ने उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। सावित्रीबाई सुकलाल टेकाम (80) पिछले कुछ वर्षों से क्रोनिक अस्थमा से पीड़ित थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन के बाद जब उनके परिजनों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाई गई, तो पता चला कि उनकी देखभाल करने या अंतिम विदाई देने के लिए कोई मौजूद नहीं था।

एक ओर वृद्धा का निर्जीव शरीर था, तो दूसरी ओर उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं। ऐसे समय में हितेश बंसोड़ ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए बिना देर किए खापरखेड़ा पहुंचने का निर्णय लिया। उन्होंने न तो रिश्ते की परवाह की और न ही इस बात की कि मृतका उनके परिवार की सदस्य नहीं थीं। उनके लिए सबसे बड़ा धर्म एक बेसहारा इंसान को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना था।
खापरखेड़ा से सावनेर तक निभाया इंसानियत का रिश्ता
खापरखेड़ा पहुंचकर हितेश बंसोड़ ने वृद्धा के शव की जिम्मेदारी संभाली और पुलिस स्टेशन में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद शव को सावनेर के राम गणेश गडकरी श्मशान घाट लाया गया, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई।
सावित्रीबाई सुकलाल टेकाम चंकापुर, सिलेवाड़ा, वार्ड क्रमांक 2, तहसील सावनेर, जिला नागपुर की निवासी थीं। अंतिम संस्कार के दौरान हितेश बंसोड़ के बेटे प्रहार हितेश बंसोड़ ने मुखाग्नि दी। जिस वृद्धा को अंतिम समय में अपने परिवार का सहारा नसीब नहीं हुआ, उन्हें एक ऐसे परिवार ने विदाई दी, जिसका उनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था। यह केवल अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मार्मिक मिसाल बन गया।
50 से अधिक बेसहारा लोगों को दे चुके हैं अंतिम विदाई
हितेश बंसोड़ ‘हितज्योति आधार फाउंडेशन’ के माध्यम से बेघर, बेसहारा, अनाथ, दिव्यांग और दुर्घटनाओं के शिकार लोगों की सहायता के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। जरूरतमंदों की मदद करने के साथ-साथ वे उन लोगों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी उठाते हैं, जिनके पीछे कोई अपना नहीं होता। अब तक वे 50 से अधिक बेसहारा लोगों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करा चुके हैं।
इस पुनीत कार्य में ज्योति हितेश बंसोड़, प्रहार हितेश बंसोड़, रुद्राक्षी हितेश बंसोड़, अभिषेक कोठाड़े, आकाश यादव, आर्यन कतकड़े, नरेंद्र समदुरकर और राजेश सिंदेवार ने सहयोग किया।








