– उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन पर लगाया 1 लाख रुपये का जुर्माना
नई दिल्ली :- कश्मीर से परिवार के साथ घूमकर लौट रहे छत्तीसगढ़ के एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब कन्फर्म टिकट होने के बावजूद उन्हें ओवरबुकिंग का हवाला देकर विमान में चढ़ने से रोक दिया गया। मामले को उपभोक्ता आयोग में ले जाने पर आयोग ने एयरलाइन को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए न्यायाधीश को 1 लाख रुपये का मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीज की पीठ ने 17 जून को सुनाए अपने फैसले में कहा कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण शिकायतकर्ता को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। साथ ही उन्हें दो दिन तक दिल्ली में रुकना पड़ा, जबकि उनका परिवार अकेले ही रायपुर के लिए रवाना हो गया।
क्या था मामला?
शिकायतकर्ता भूपेंद्र कुमार वासनिकर, जो छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं, ने 28 मई 2023 को दिल्ली से रायपुर जाने के लिए अपने परिवार के चार कन्फर्म टिकट बुक कराए थे। परिवार कश्मीर से दिल्ली पहुंचा था और वहां से रायपुर लौटना था। शिकायत के अनुसार, एयरलाइन ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनका टिकट रद्द कर दिया और उन्हें बोर्डिंग की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उनका परिवार तो रायपुर रवाना हो गया, लेकिन वे स्वयं दिल्ली में ही फंस गए। आयोग के समक्ष पेश रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 9 मई 2023 को दिल्ली-रायपुर का टिकट 7,204 रुपये में खरीदा था। आरोप है कि एयरलाइन ने 28 मई को वही सीट लगभग 40 हजार रुपये में किसी अन्य यात्री को बेच दी।
आयोग का फैसला
उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, असुविधा और उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा तथा 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करे। आयोग ने स्पष्ट किया कि कन्फर्म टिकट होने के बावजूद यात्री को ओवरबुकिंग के नाम पर विमान में चढ़ने से रोकना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।








