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कोराडी बनेगा स्वच्छ बिजली का केंद्र

– 13,200 करोड़ की परियोजना से 1,320 मेगावाट बढ़ेगी क्षमता

नागपुर :- कोराडी थर्मल पावर स्टेशन के 13,200 करोड़ रुपये के विस्तार प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के तहत 660-660 मेगावाट क्षमता की दो नई सुपरक्रिटिकल इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों से लैस ये इकाइयां महाराष्ट्र के स्वच्छ कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में शामिल होने की उम्मीद है।

महाजेनको की इस परियोजना से कोराडी पावर स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 2,190 मेगावाट से बढ़कर 3,510 मेगावाट हो जाएगी। इससे राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और उद्योगों, कृषि, बुनियादी ढांचे तथा घरेलू उपभोक्ताओं की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। परियोजना की प्रमुख विशेषता फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) और सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (एससीआर) प्रणालियों का इस्तेमाल है। एफजीडी तकनीक से सल्फर डाइऑक्साइड, जबकि एससीआर प्रणाली से नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सुपरक्रिटिकल तकनीक के कारण कम कोयले में अधिक बिजली उत्पादन संभव होगा, जिससे प्रति यूनिट बिजली उत्पादन पर ईंधन की खपत और उत्सर्जन की तीव्रता कम होने की उम्मीद है।

नवंबर से उपकरणों को स्थापित करने का काम

महाजेनको के अनुसार, निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यूनिट-11 के बॉयलर की नींव का काम पूरा हो चुका है। दोनों इकाइयों के टर्बाइन जनरेटर की नींव तथा चिमनी की आधार संरचना का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की विभिन्न निर्माण इकाइयों से उपकरणों और अन्य सामग्री की आपूर्ति शुरू हो गई है। अगले महीने से उपकरणों को स्थापित करने का काम शुरू करने की योजना है।

इस परियोजना के तहत यूनिट-11 को मई 2029 और यूनिट-12 को नवंबर 2029 तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस वर्ष परियोजना के मुख्य नियंत्रण कक्ष भवन की आधारशिला रखी थी। परियोजना पूरी होने के बाद कोराडी राज्य के प्रमुख बिजली उत्पादन केंद्रों में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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