नागपुर, १४ : यहाँ की स्वागत सोसायटी में सनातन संस्था के तत्वावधान में गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर युवाओं के लिए विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में गौरी जोशी एवं ॲड. वैशाली परांजपे ने युवाओं को प्रेरक और कार्यप्रवण विचारों से मार्गदर्शन किया।
गौरी जोशी ने कहा, “सच्चा व्यक्तित्व विकास केवल करियर कोचिंग या शारीरिक प्रशिक्षण से नहीं होता, अपितु यह आध्यात्मिक साधना से ही संभव है। स्वभाव दोषों को दूर करना, गुण वृद्धि करना, अंतर्मुखता, संयम और निरंतर साधना करना यही व्यक्तित्व विकास का वास्तविक मार्ग है।”
ॲड. वैशाली परांजपे ने कहा, “माता-पिता और शिक्षक हमारे प्रथम गुरु होते हैं, लेकिन जीवन में आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता भी होती है। आध्यात्मिक गुरु ही हमें ईश्वर का ज्ञान देते हैं, आत्म-परिचय करवाते हैं और जीवन का सच्चा उद्देश्य सिखाते हैं। साधना के मार्ग से वे जीवन सात्विक बनाते हैं, अहंकार और दोष दूर कर जीवन में आनंद कैसे प्राप्त करना है, यह सिखाते हैं। जैसे समर्थ रामदास स्वामी, छत्रपति शिवाजी महाराज के, और स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु थे।”
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन पद्मनाभ परांजपे ने किया। अपने अनुभव साझा करते हुए निहारिका नागपुरकर, समृद्धि सिंग और श्रीवल्लभ जोशी ने बताया कि साधना का उनके जीवन पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। युवाओं के इन अनुभवों से अन्य उपस्थित जनों को भी आत्मपरीक्षण की प्रेरणा मिली।
विशेष अभिप्राय :
शशिकांत नंदकुमार पिंपळे ने कहा, “कार्यक्रम का विषय अत्यंत उपयुक्त लगा। हर किसी ने अपने अनुभव साझा किए जिससे संवाद बना और बहुत कुछ सीखने को मिला। भगवान का स्मरण मन को कैसे शांत करता है, यह समझ में आया।”
सिद्धि किटकरु ने कहा, “इस संगठित मंच से यह समझ में आया कि पढ़ाई की कठिनाइयाँ केवल मेरी ही नहीं, सबकी होती हैं और साधना के माध्यम से उन्हें पार करना सीखा जा सकता है।”
जान्हवी वेळेकर ने कहा, “आज का सत्र बेहद प्रभावशाली था। जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर आध्यात्मिक स्पर्श की आवश्यकता होती ही है। दोनों का मार्गदर्शन सुनकर मन आनंदित हुआ। हमें अपने धर्म पर गर्व होना चाहिए। मेरे कुछ मित्र मेरी श्रद्धा पर सवाल उठाते हैं और उत्तर देना कठिन हो जाता है, लेकिन आज के सत्र से ‘हिंदू होने का गर्व’, अध्यात्म, योग, मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास, और कृतज्ञता ये सभी बातें सुंदर और गहराई से समझ में आईं।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ एवं पालक उपस्थित थे। व्याख्यान के पश्चात उपस्थित लोगों ने ऐसी नियमित कक्षाएं प्रारंभ करने की माँग आयोजकों से की।




