– बिना जाँच–बिना प्रक्रिया ज़मीन हस्तांतरण! तहसीलदार पर दोबारा गंभीर आरोप
नागपुर :- पुणे मुंधवा में करोड़ों रुपये की सरकारी ज़मीन का अवैध लेन-देन कुछ चुनिंदा निजी व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया था और यह सरकारी ज़मीन हड़पने की एक सुनियोजित साजिश थी। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे पत्र में माँग की कि इस घोटाले में शामिल सभी अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
24 अक्टूबर, 1973 को यह ज़मीन ‘वनस्पति सर्वेक्षण विभाग’ को 1 रुपये वार्षिक किराए पर 15 साल के पट्टे पर दी गई थी। बाद में इसे 31 मार्च, 2038 तक बढ़ा दिया गया। 30 दिसंबर, 2024 को श्रीमती शीतल तेजवानी ने किसी भी आधिकारिक सरकारी निर्णय, तहसीलदार या ज़िला कलेक्टर के आदेश के अभाव के बावजूद, ज़िला कलेक्टर कार्यालय में ‘भूमि स्वामित्व मूल्य’ के रूप में ब्याज सहित केवल 11 हज़ार रुपये जमा किए।
अधिकारियों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के यह राशि स्वीकार कर ली। विक्रय विलेख 20 मई, 2025 को पंजीकृत किया गया। भूमि के स्वामित्व के प्रमाण, प्रतिफल, बाजार मूल्य, स्टाम्प शुल्क का कोई उल्लेख नहीं है। नगर सर्वेक्षण संपत्ति कार्ड उपलब्ध होने के बावजूद, विलेख केवल पुराने 7/12 के आधार पर पंजीकृत किया गया। पंजीयन अधिकारी और तहसीलदार ने मिलीभगत से सरकारी भूमि को एक निजी व्यक्ति को हस्तांतरित करने का अपराध किया। 9 जून, 2025 को, तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने बिना किसी जाँच-पड़ताल के, अमीडिया कंपनी की माँग के अनुसार बीएसआई को भूमि खाली करने का आदेश दिया। जैसा कि वडेट्टीवार ने पत्र में उल्लेख किया है, इसी अधिकारी पर पहले बोपोडी में एक मामले में मामला दर्ज किया जा चुका है। तहसीलदार ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़ा करने के लिए लाभार्थियों के पक्ष में रुख अपनाया। पैतृक भूमि के हस्तांतरण संबंधी 2021 के सरकारी आदेश का उल्लंघन करते हुए, सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भी भूमि का स्वामित्व मूल्य अवैध रूप से स्वीकार कर लिया गया।








