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पीएम बोले ईंधन बचाओ, मनपा में बढ़ता गया किराये की गाड़ियों का काफिला

– बस से पहुंचीं सभापति, मगर मनपा के वाहन नहीं हुए वापस; उठा बड़ा सवाल

– जनता को मेट्रो की सलाह, मनपा के खर्च पर घमासान

 नागपुर :- खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और ऊर्जा संरक्षण की अपील की है. इसके विपरीत महानगरपालिका (मनपा) में किराये के वाहनों का बढ़ता बेड़ा और उस पर खर्च हो रहे लाखों रुपये अब एक गंभीर चर्चा का विषय बन गए हैं. प्रधानमंत्री की अपील स्वयं मनपा के सत्ता पक्ष भाजपा द्वारा होने का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब तक किसी भी पदाधिकारी ने मनपा को वाहन वापस नहीं किए है. सभी पदाधिकारियों के पास वाहन बने हुए हैं जिसकी जानकारी प्रशासन द्वारा उजागर की गई. उल्लेखनीय है कि 2 दिन पहले स्थायी समिति सभापति बस से मनपा पहुंची थी. एक ओर स्थायी समिति सभापति बस से यात्रा कर रही है. वहीं दूसरी ओर उन्हें आवंटित वाहन वापस नहीं होने की जानकारी प्रशासन द्वारा उजागर की जा रही है जिससे मनपा गलियारों में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है.

प्रतिष्ठा का विषय बने वाहन : मनपा के विभिन्न विभागों द्वारा चारपहिया गाड़ियां, एसयूवी (एसयूवी), बोलेरो पिकअप, जेमिनी ट्रक, पानी के टेंकर, हाइड्रोलिक लैडर और पशु एम्बुलेंस जैसे वाहन किराये पर लिए गए हैं. हैरानी की बात यह है कि जो प्रशासन आम नागरिकों को इंधन बचाने की सलाह देता है वह स्वयं वाहनों के उपयोग में कोई कटौती नहीं कर रहा है. अधिकारी, विभागाध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों के लिए अब इन वाहनों का उपयोग जरूरत से ज्यादा प्रतिष्ठा (स्टेटस सिंबल) का विषय बन गया है. अक्सर देखा गया है कि एक ही काम के लिए 2-2 वाहनों का इस्तेमाल होता है, जबकि कई वाहन दिनभर कार्यालय के बाहर ही खाली खड़े रहते हैं.

लाखों में पहुंच रहा खर्च : वर्तमान में मनपा के विभिन्न विभागों में 100 से अधिक वाहन कार्यरत हैं. इनमें से कुछ वाहनों का मासिक किराया 40 से 50 हजार रुपये है, जबकि कुछ के लिए प्रति दिन हजारों रुपये का अनुबंध किया गया है. यदि इन वाहनों के ईंधन, ड्राइवर के वेतन, रखरखाव और अतिरिक्त भत्तों को मिला दिया जाए तो यह कुल खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है. प्रधानमंत्री ने निजी वाहनों के बजाय ‘मेट्रो’ का उपयोग करने की सलाह दी है जिससे यह अपेक्षा की जा रही थी कि पदाधिकारी और अधिकारी निजी वाहनों का उपयोग कम करके मेट्रो या इलेट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देंगे.

इसके विपरीत पर्यावरण के अनुकूल संदेश देने के लिए पूर्व आयुक्त राधाकृष्णन बी. द्वारा शुरू की गई ‘एक दिन साइकिल डे’ योजना अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है. अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा साइकिल से कार्यालय आने की यह पहल केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह गई थी.

लाखों खर्च के बीच साइकिल योजना ठंडे बस्ते में

आज होगी अहम बैठक : इस मुद्दे पर विवाद बढ़ता देख मनपा में सत्तापक्ष के नेता वाल्या बोरकर ने मनपा द्वारा दिया गया वाहन वापस कर दिया है और अपने निजी वाहन का उपयोग करना शुरू कर दिया है. बोरकर ने बताया कि 15 मई को भाजपा जा की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है जिसमें इस बात पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि पार्टी के पदाधिकारी मनपा बन के वाहनों का उपयोग करेंगे या नहीं.

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