– सुखकर्ता हॉस्पिटल के बाहर शव रखकर परिजनों का हंगामा
नागपुर :- शहर के म्हालगी नगर चौक स्थित सुखकर्ता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान छह माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद सोमवार को अस्पताल परिसर के बाहर जमकर हंगामा हुआ। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को अस्पताल के बाहर रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। सूचना मिलते ही हुडकेश्वर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी। मृतका की पहचान बीडीपेठ निवासी प्रियंका मनीष पोटदुखे के रूप में हुई है।
परिजनों के अनुसार शनिवार तड़के पेट में तेज दर्द होने पर उन्हें सुखकर्ता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। प्रियंका छह माह की गर्भवती थीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन को गर्भस्थ शिशु की गंभीर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया। उनका कहना है कि इलाज में देरी और कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गंभीर स्थिति के बावजूद अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और केवल नर्सिंग स्टाफ ही मरीज की देखभाल कर रहा था। उनका दावा है कि महिला की हालत बिगड़ने के बाद जिम्मेदारी से बचने के लिए उसे दिघोरी स्थित यश हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
हुडकेश्वर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस का कहना है कि परिजनों की शिकायत के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।





