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जिप की कुर्सी के लिए सजेगी सियासी बिसात!

– सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी से चुनाव का रास्ता साफ, कांग्रेस-भाजपा ने कसी कमर

नागपुर :-  राज्य की 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के लंबित चुनावों का रास्ता साफ होने के बाद अब नागपुर सहित विदर्भ में भी चुनावी सरगर्मियां तेज होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की उम्मीद है। फैसले से विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से नागपुर में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत के बाद कांग्रेस खेमे में नया उत्साह है।

नागपुर जिला परिषद का पिछला कार्यकाल 17 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था। ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मामला न्यायालय में लंबित रहने के कारण चुनाव टल गए थे। पिछले करीब 21 महीनों से जिला परिषद में प्रशासक राज लागू है। अब चुनाव का रास्ता खुलने से ग्रामीण राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ने वाली है।

‘मिशन जिला परिषद’ दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

नागपुर जिला परिषद के चुनाव कांग्रेस और भाजपा, दोनों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होंगे। पिछली बार जिला परिषद में कांग्रेस का दबदबा था। 57 सदस्यीय जिला परिषद में कांग्रेस के 32 और राष्ट्रवादी कांग्रेस के 8 सदस्य थे। इस तरह महाविकास आघाड़ी के पास कुल 40 सदस्यों का समर्थन था, जबकि भाजपा के केवल 14 सदस्य चुनकर आए थे। शिवसेना, शेतकरी कामगार पक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और निर्दलीय के एक-एक सदस्य थे।

पिछले चुनाव में पूर्व मंत्री सुनील केदार की रणनीति के चलते कांग्रेस को जिला परिषद में स्पष्ट बहुमत मिला था। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद जिले की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया। सुनील केदार की पत्नी अनुजा केदार और पूर्व मंत्री अनिल देशमुख के पुत्र सलील देशमुख की विधानसभा चुनाव में हार से कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के स्थानीय खेमों को झटका लगा था। दूसरी ओर, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अभिजीत वंजारी की जीत से महाविकास आघाड़ी को फिर से राजनीतिक ऊर्जा मिली है।

इस बार भाजपा की ओर से भी जिला परिषद पर कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत लगाए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और राज्य मंत्री आशीष जायसवाल के लिए भी यह चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का विषय होगा। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के सामने अपनी पुरानी सत्ता वापस पाने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा जिला परिषद में पहली बार अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश करेगी।

अध्यक्ष पद के आरक्षण की लॉटरी पहले निकलेगी

जिला परिषद चुनाव की घोषणा से पहले अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। नियमानुसार चुनाव से छह महीने पहले ग्राम विकास विभाग को अध्यक्ष पद के आरक्षण की लॉटरी निकालनी होती है। इसके बाद आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

वर्ष 2019 में नागपुर जिला परिषद अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। उस समय पहले रश्मि बर्वे और बाद में मुक्ता कोकड्डे अध्यक्ष बनी थीं। जिला परिषद में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने के कारण इस बार निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण में बदलाव की संभावना है। पिछली बार सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहे कुछ निर्वाचन क्षेत्र इस बार महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं। ऐसे में मौजूदा महिला सदस्यों को दोबारा चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा या नहीं, इस पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

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