नागपुर :- सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जिसमें कक्षा 1 से कक्षा 8 तक पढ़ाने वाले प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए दो साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, राज्य में शिक्षकों को पहले से ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद एक और समस्या खड़ी हो गई है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों को लेकर इसी तरह की पाबंदी लगा दी है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) 7 जुलाई, 2026 को होनी है। वहीं, राज्य में 12 जिला परिषदों और उनके अधीन 125 पंचायत समितियों के आम चुनाव 7 फरवरी को होने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जिला परिषदों और उनके अधीन पंचायत समितियों के आम चुनावों के लिए 31 जनवरी के बाद सिर्फ दो सप्ताह का विस्तार दिया है। इसलिए चुनाव आयोग के लिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। दूसरी ओर, शिक्षकों की सेवा मतदान केंद्रों पर ली जा रही है। इसलिए सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षकों को अब मतदान केंद्रों पर अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए या उन्हें कोर्ट के आदेश के अनुसार सीटीईटी परीक्षा देनी चाहिए। राज्य चुनाव आयोग ने राज्य के 12 जिला परिषदों और उनके अंतर्गत आने वाली 125 पंचायत समितियों के 2026 के आम चुनावों का संशोधित कार्यक्रम घोषित कर दिया है और तदनुसार मतदान की तिथि 7 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के सभी प्रशासनिक विद्यालयों के शिक्षकों को इन चुनावों के संचालन के लिए चुनाव आदेश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षकों का पहला प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और दूसरा प्रशिक्षण 31 जनवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा। हालांकि, इसी दौरान, यानी 7 और 8 फरवरी 2026 को, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरे देश में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षा का कार्यक्रम पहले ही घोषित किया जा चुका है और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने इसके लिए आवेदन किया है। साथ ही, कई छात्र सीटीईटी परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं








