– मनरेगा के बाद शिक्षा और खाद्य सुरक्षा अधिकार कानून में सुधार की तैयारी शुरू
नई दिल्ली :- केंद्र सरकार अब मनरेगा के बाद UPA सरकार के दौर में बने दो अहम कानूनों शिक्षा का अधिकार (RTE) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। सरकार का मकसद है कि इन योजनाओं का लाभ हर वास्तविक और पात्र व्यक्ति तक पहुंचे और सभी लाभार्थियों का 100% पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
सरकार पहले इन कानूनों से जुड़े नियमों और आदेशों में बदलाव के जरिए सुधार करने की कोशिश करेगी। अगर इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो संसद में नए संशोधन विधेयक (Bill) भी लाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार यह भी विचार कर रही है कि आवास के अधिकार को एक कानूनी अधिकार का दर्जा दिया जाए।
परामर्श प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मनमोहन सिंह सरकार के समय बनाए गए विकास से जुड़े अधिकार आधारित कानूनों में तीन बड़ी खामियां सामने आई हैं-शिक्षा का अधिकार होने के बावजूद हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाई। खाद्य सुरक्षा कानून के बावजूद हर जरूरतमंद परिवार तक राशन नहीं पहुंच सका।
योजनाओं के क्रियान्वयन में लीकेज और अपात्र लाभार्थियों की समस्या बनी रही।
भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 लागू किया गया है। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। इस कानून के तहत FSSAI की स्थापना की गई। यह कानून किसानों और खाद्य उत्पादकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, थोक और खुदरा विक्रेताओं, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं, ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो ₹10 लाख तक जुर्माना, लाइसेंस रद्द और गंभीर मामलों में जेल की सजा तक का प्रावधान है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21A में निहित है। कानून 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ था। कॉलेज और विश्वविद्यालय इस कानून के दायरे में नहीं है। 14 वर्ष से अधिक उम्र के छात्र इसमें शामिल नहीं होते हैं।








