– 16 अक्टूबर से 74 एमएलडी की कटौती का प्रस्ताव
नागपुर :- नागपुर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत तोतलाडोह जलाशय में पानी का भंडार तेजी से घटकर 49.85% रह गया है। पिछले चार वर्षों में यह सबसे निचला स्तर है। जलाशय में घटते जलभंडार ने शहर की जलापूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नागपुर को प्रतिदिन मिलने वाले 740 मिलियन लीटर पानी में से लगभग 70% आपूर्ति पेंच जलप्रणाली से होती है। ऐसे में जलभंडार में आई गिरावट आने वाले महीनों में चुनौती बढ़ा सकती है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 को तोतलाडोह जलाशय में 506.99 मिलियन घनमीटर (एमसीएम) पानी शेष था। इसकी निर्धारित उपयोगी जलभंडारण क्षमता 1,016.93 एमसीएम है। पिछले वर्ष इसी तारीख को जलाशय 99.92% भरा हुआ था। वर्ष 2024 में इसका जलस्तर 99.45% और 2023 में 98.45% था। यानी एक साल में जलभंडार में लगभग 509.10 एमसीएम की कमी दर्ज की गई है।
10% कटौती लागू हुई तो 74 एमएलडी कम पानी
नागपुर में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 740 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें पेंच-1, 2, 3 और 4 जलशुद्धीकरण केंद्रों से 520 एमएलडी, जबकि कन्हान जलशुद्धीकरण केंद्र से 220 एमएलडी पानी मिलता है।
16 अक्टूबर से प्रस्तावित 10% पानी कटौती यदि पूरी जलापूर्ति पर समान अनुपात में लागू होती है, तो शहर को प्रतिदिन करीब 74 एमएलडी कम पानी मिल सकता है। इससे कुल उपलब्धता घटकर लगभग 666 एमएलडी रह जाएगी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी और प्रस्तावित कटौती का अर्थ यह जरूरी नहीं है कि नागरिकों को मिलने वाले पीने के पानी में पूरे 10% की कमी होगी।
अन्य जलाशयों में भी घटा जलस्तर
पेंच जलप्रणाली से जुड़े अन्य प्रमुख जलाशयों में भी पिछले वर्ष की तुलना में पानी का भंडार कम हुआ है। 7 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, कामठी-खैरी जलाशय में 78.16% पानी शेष था, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन यह 98.43% भरा हुआ था। खिंडसी जलाशय का जलस्तर 66.17%, नांद का 84.54% और वड़गांव का 58.98% दर्ज किया गया। पिछले वर्ष इसी तारीख को इन तीनों जलाशयों में पानी का भंडार 100% था।
आने वाले महीनों में जल प्रबंधन की चुनौती:
तोतलाडोह में जलभंडार का लगभग आधा रह जाना और अन्य जलाशयों में भी गिरावट दर्ज होना जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। शहर की प्रतिदिन 740 एमएलडी पानी की मांग के बीच प्रस्तावित कटौती को लेकर प्रशासन के सामने उपलब्ध जलस्रोतों का उचित नियोजन करने की चुनौती है। आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए जलभंडार का सावधानीपूर्वक उपयोग और पानी की बचत अहम होगी।








