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शहर में 5,948 कुएं-बोरवेल, लेकिन पानी पीने योग्य?

– भूजल के 12 नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक

–  8 नमूने मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त

नागपुर :- नागपुर में जलसंकट की आशंका के बीच शहर के 5,948 कुएं और बोरवेल पानी का वैकल्पिक स्रोत बन सकते हैं। हालांकि, भूजल की गुणवत्ता को लेकर सामने आए निष्कर्षों ने इस पानी की सुरक्षित उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई भूजल नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में निवासी संदेश सिंगलकर द्वारा दायर जनहित याचिका के सिलसिले में सीजीडब्ल्यूबी ने यह जानकारी प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 के मानसून-पूर्व सीजन में नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र से लिए गए भूजल के 57 नमूनों की 14 मानकों पर जांच की गई थी। जांच में फ्लोराइड की मात्रा 0.45 से 3.84 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच मिली, जबकि औसत मात्रा 1.97 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। कुल 57 नमूनों में से 12 में फ्लोराइड का स्तर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की निर्धारित अधिकतम सीमा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाया गया। इनमें से आठ नमूनों को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त बताया गया। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन आठ नमूनों को अनुपयुक्त घोषित करने के लिए केवल फ्लोराइड ही जिम्मेदार था या अन्य मानक भी प्रभावित थे।

वहीं, 50 नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर के भीतर रही। कुल घुलनशील ठोस पदार्थों (टीडीएस) की मात्रा 277 से 2,594 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच दर्ज की गई। पूर्वी नागपुर के दो नमूनों में विद्युत चालकता 3,000 माइक्रोसीमेंस प्रति सेंटीमीटर से अधिक पाई गई। यूरेनियम की मात्रा निर्धारित सीमा 30 पार्ट्स प्रति बिलियन से कम रही।

भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सीमा में

वर्ष 2024 के मानसून-पूर्व आकलन में भूजल के 65 नमूनों की भारी धातुओं के लिए जांच की गई। सीजीडब्ल्यूबी के अनुसार, आर्सेनिक, क्रोमियम, सीसा, पारा, निकेल और मैंगनीज सहित जांची गई धातुओं की मात्रा निर्धारित मानकों के भीतर थी। हालांकि, फ्लोराइड की अधिक मात्रा वाले स्थानों पर दोबारा जांच की गई या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध निष्कर्षों में नहीं है।

दूषित कुओं को बंद करने की सिफारिश

सीजीडब्ल्यूबी ने भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच करने और दूषित पाए गए कुओं को तत्काल सील करने की सिफारिश की है। जहां उपयुक्त हो, वहां दूषित भूजल को सतही जल के साथ मिलाकर उपयोग करने का सुझाव भी दिया गया है।

इसके अलावा, छतों पर वर्षा जल संचयन, पानी के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण, पेयजल तथा अन्य घरेलू उपयोग के लिए अलग-अलग जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने और पानी की बर्बादी रोकने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।

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