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मिनरल वाटर या सिर्फ ठंडा पानी ? नागपुर में जार कारोबार पर सवाल

– सील के बिना ‘मिनरल’ का खेल: सेहत से खिलवाड़ का आरोप

– समारोहों में धड़ल्ले से बिक रहा संदिग्ध पानी, प्रशासन मौन

– 20 से 60 रुपये में जोखिम! जार वाले पानी पर उठे गंभीर सवाल

नागपुर :- मिनरल वाटर के नाम पर ठंडा पानी जार में बेंचने का गोरखधंधा तेजी से चल रहा है। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का आरोप है कि यह धंध अन्न व औषधि प्रशासन की मूक सहमति से फल-फूल रहा है। जो सीलबंद नहीं है तथा बिना परीक्षण किया पानी पीना मानवी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। हाईकोर्ट के नागपुर खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनाए फैसले के हवाले से मिनरल वाटर के नाम पर जार में पानी बेचकर मानवी स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया है। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य गजानन पांडे ने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्र में विवाह तथा अन्य समारोह में ठंडा पानी मिनरल वाटर के नाम पर जार में भरकर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। पानी जल्द ठंडा करने के लिए किसी केमिकल का उपयोग किए जाने की आशंका है। बिना परीक्षण किए पानी की शुद्धता जांचे बिना उसे पीने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। अन्न व औषधि प्रशासन सब कुछ जानकर भी मूक दर्शक बना हुआ है। सही मायने में युवी स्टरीलाइजेशन, फिल्टर कर ओजोनाइजेशन प्रक्रिया करने के बाद परीक्षण कर सीलबंद करना अपेक्षित है। गली-कूचों में कारखाने लगाकर मिनरल वाटर के नाम पर ठंडा पानी बेचा जा रहा है।अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने आरोप लगाया है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह समारोहों तथा अन्य आयोजनों में बिना सीलबंद जार का पानी “मिनरल वाटर” बताकर बेचा जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

पंचायत के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य गजानन पांडे के अनुसार, इस पानी की शुद्धता की कोई प्रमाणिक जांच नहीं की जाती। भारतीय मानक ब्यूरो, अन्न व औषधि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला से परीक्षण के बिना ही यह पानी बाजार में पहुंच रहा है। आरोप है कि संबंधित विभाग सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पानी को जल्दी ठंडा करने के लिए किसी रासायनिक पदार्थ के उपयोग की आशंका भी जताई गई है। जबकि नियमानुसार पानी को यूवी स्टरलाइजेशन, फिल्ट्रेशन और ओजोनाइजेशन प्रक्रिया से शुद्ध कर परीक्षण के बाद सीलबंद कर बेचा जाना चाहिए। इसके विपरीत, गली-कूचों में छोटे कारखाने लगाकर साधारण ठंडा पानी जार में भरकर “मिनरल वाटर” के नाम पर बेचा जा रहा है।

यह पानी 20 से 60 रुपये प्रति जार तक बेचा जा रहा है। ग्राहक पंचायत का कहना है कि इससे न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ पड़ रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। संगठन ने संबंधित विभागों से सख्त जांच और कार्रवाई की मांग की है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक के अनुरूप पेयजल मिल सके।

शिकायत पर कार्रवाई नहीं

यह पानी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित है। 20 से 60 रुपए में पानी का जार बेचकर ग्राहकों की जेब पर डाका डालकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। भारतीय मानक ब्यूरो, अन्न व औषधि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला से कोई भी जांच नहीं की जा रही है। इसकी सभी विभागों से शिकायत करने पर कोई भी कार्रवाई नहीं किए जाने का पांडे ने आरोप लगाया।

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