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ऑपरेशन सूर्या” : 3 साल के मासूम का अपहरण, 3.5 लाख में सौदा… पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में बचाया बच्चा!

– चंद्रपुर से तेलंगाना तक 24 घंटे का ऑपरेशन…

चंद्रपुर / बल्लारपुर :- 28 फरवरी की काली रात… घड़ी में करीब 3 बजे का वक्त… मजदूर परिवार गहरी नींद में… और उसी सन्नाटे को चीरती एक चारपहिया गाड़ी। कुछ ही पलों में 3 वर्षीय मासूम सूर्या कुंजाम को उठाकर अज्ञात बदमाश फरार हो जाते हैं।

लेकिन उन्हें क्या पता था कि चंद्रपुर पुलिस 24 घंटे के भीतर ऐसा जाल बिछाएगी कि पूरी “बच्चा चोर गैंग” बेनकाब हो जाएगी!

आधी रात का खौफनाक अपहरण

बल्लारपुर के एक शेड में मजदूरी करने वाला कुंजाम परिवार रोज की तरह सोया हुआ था। परिवार में 3 साल का सूर्या और 6 महीने की नन्ही सोनाक्षी।

मां सीमा राजेंद्र कुंजाम की आंख खुली तो मासूम सूर्या गायब! परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।

एक जागरूक नागरिक ने बताया —

“रात में एक कार खड़ी थी… एक आदमी बच्चे को लेकर भागा… पहले लगा लोहे की चोरी हो रही है, पर असली सच्चाई सुबह सामने आई।”

100 CCTV, 7 टीमें और हाईटेक ट्रैकिंग!

मामले की गंभीरता को देखते हुए चंद्रपुर पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आई।

7 विशेष टीमें गठित

100 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले गए

संदिग्ध चारपहिया वाहन की पहचान

रास्ते में एक होटल में बिरयानी खाते हुए आरोपी — और भुगतान ऑनलाइन!

यहीं से पुलिस को मिला पहला डिजिटल सुराग… और शुरू हुआ टेक्निकल ट्रैकिंग का असली खेल!

3 लाख 50 हजार में मासूम का सौदा!

पुलिस जांच की कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस सीधे पहुंची तेलंगाना के मंचेरियल जिले में।और वहा से धर दबोजा अपराधीयोकॊ जिनमे गिरफ्तार आरोपी:

60 वर्षीय एलक्का रायसिंग बुददे

30 वर्षीय रानी विनोदकुमार पसनोटी

40 वर्षीय संगीता व्यंकटेश पानगणती

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा —

मासूम सूर्या को मंथनी गांव की एक महिला को 3.5 लाख रुपये में बेच दिया गया!

बताया गया कि महिला को 12 साल से संतान नहीं थी, इसलिए उसने बच्चा “खरीद” लिया।

चंद्रपुर पुलिस ने तेलंगाना पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए मंथनी गांव में दबिश दी।

50 वर्षीय सातक्का चंद्रया करेरे

34 वर्षीय लावण्या कुमारस्वामी कोणा को हिरासत में लिया गया।

और फिर वो पल आया जिसका सबको इंतजार था —

24 घंटे के भीतर मासूम सूर्या अपनी मां की गोद में वापस! बल्लारपुर से लेकर चंद्रपुर तक पुलिस की इस तेजतर्रार कार्रवाई की जमकर सराहना हो रही है।

अभी बाकी है असली मास्टरमाइंड!

पुलिस जांच में सामने आया है कि दो अन्य आरोपी बल्लारपुर में पहले से सूर्या की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने दिनचर्या समझकर साजिश रची।

क्या ये गिरोह पहले भी ऐसे अपराध कर चुका है?

क्या यह बड़ा ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट है?

पुलिस अब इन सवालों के जवाब तलाश रही है।

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