– लकड़गंज जोन का मामला, FIR दर्ज कराने की सिफारिश
– सफाई कर्मचारियों की सैलरी और एडवांस बाहरी खातों में ट्रांसफर
नागपुर :- नागपुर महानगरपालिका में करीब 41.79 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आया है। आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि लकड़गंज जोन के क्लास-4 सफाई कर्मचारियों के वेतन और राखी एडवांस के लिए जारी राशि को कथित रूप से आरटीजीएस भुगतान सूची में हेरफेर कर बाहरी लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। वित्त विभाग की जांच में मनपा की राशि के गबन के प्रथमदृष्टया प्रमाण मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों, बिल क्लर्क और जिन बाहरी लोगों के खातों में राशि पहुंची, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि संबंधित जोन अधिकारी और सहायक आयुक्त ने उचित निगरानी रखी होती तो इस तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार जांच रिपोर्ट में साहिल सरवन (स्थापना शाखा कर्मचारी) और उज्ज्वला भगत (सफाई जमादार) को मुख्य आरोपी बताया गया है। आरोप है कि दोनों ने अपने निजी ई-मेल आईडी से आरटीजीएस भुगतान सूची तैयार कर बैंक को भेजी और बाद में ई-मेल डिलीट कर सबूत मिटाने का प्रयास किया। हालांकि, जांच अधिकारियों ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सिविल लाइंस स्थित मनपा शाखा से डिलीट किए गए ई-मेल और आरटीजीएस सूची बरामद कर ली, जो मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य माने जा रहे हैं।
अंतिम चरण में हुई हेराफेरी
मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी (सीएएफओ) के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि ई-गवर्नेंस प्रणाली के माध्यम से तैयार वेतन बिलों की नियमित जांच और मंजूरी के बाद राशि आरटीजीएस के जरिए जोन के खाते में भेजी गई थी।लेकिन, अंतिम चरण में बैंक को भेजी गई आरटीजीएस सूची में कथित रूप से ऐसे लोगों के नाम जोड़ दिए गए, जिनका मनपा के वेतन भुगतान से कोई संबंध नहीं था। इसी हेराफेरी के जरिए सरकारी राशि बाहरी खातों में भेजी गई।
जनवरी से जून 2023 के रिकॉर्ड में खुलासा
जनवरी से जून 2023 के वेतन बिल, आरटीजीएस रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों की जांच में पता चला कि 41,78,977 रुपये ऐसे व्यक्तियों के खातों में भेजे गए, जिनका मनपा से कोई संबंध नहीं था। इस मामले में मुख्य स्वच्छता अधिकारी डॉ. गजेंद्र महल्ले ने सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर लकड़गंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। यह जांच तत्कालीन शिवसेना (उबाठा) शहर प्रमुख नितिन तिवारी की शिकायत के बाद शुरू की गई थी। नितिन तिवारी वर्तमान में शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हैं।
फोरेंसिक ऑडिट की सिफारिश
जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि यह अनियमितता केवल छह महीने तक सीमित नहीं हो सकती। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या ऑडिट विभाग से फोरेंसिक जांच कराने की सिफारिश की गई है, ताकि घोटाले की वास्तविक राशि, सभी लाभार्थियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।








