वाहनों के ईंधन में इथेनॉल की मिलावट शुरू होने के बाद से वाहनों की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आम आदमी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वाहन लगातार खराब हो रहे हैं। साथ ही, मरम्मत के लिए वाहनों को मैकेनिक के पास ले जाने की परेशानी भी बढ़ गई है। लोग गुस्से में हैं। लेकिन लगता है कि गुस्से की यह लहर अभी तक इन शासकों तक नहीं पहुंची है। व्यापक रूप से आरोप लग रहे हैं कि इथेनॉल की राजनीति निजी लालच के लिए खेली जा रही है। हालांकि, सबसे ज्यादा नुकसान आम आदमी को ही उठाना पड़ रहा है। इसका एक उदाहरण हाल ही में तालुका में देखने को मिला। रामटेक शहर के निकट शीतलवाड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत रहने वाले एक अखबार के पत्रकार राजू कापसे के साथ इथेनॉल को लेकर एक घटना घटी। राजू कापसे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में अपने दोपहिया वाहन में तीन लीटर पेट्रोल भरवाया था। जब उन्होंने गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की, तो गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। उसने बार-बार कोशिश की, लेकिन गाड़ी फिर भी स्टार्ट नहीं हुई। स्टार्ट होने पर वह बंद हो जाती थी, और वह हताश होकर मैकेनिक के गैरेज पहुंचे। उसने मैकेनिक को सारी समस्या बताई। मैकेनिक ने जब गाड़ी की जांच की, तो उसे कहीं और कोई खराबी नहीं मिली। आखिरकार, जब मैकेनिक ने गाड़ी का पूरा पेट्रोल खाली किया, तब जाकर एथेनॉल की सच्चाई सामने आई। जब पता चला कि तीन लीटर पेट्रोल में कम से कम एक चौथाई से एक लीटर एथेनॉल मिला हुआ है, तो पत्रकार राजू कापसे ने एथेनॉल और नेताओं के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की। यह कई लोगों के साथ हो रहा है। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं कि वे चुपचाप बैठे हैं और इसका आर्थिक बोझ उठा रहे हैं। आम जनता नेताओं से पूछ रही है कि वे शुद्ध ईंधन में इथेनॉल मिलाकर उन्हें क्यों परेशान कर रहे हैं। इथेनॉल की मिलावट को जल्द से जल्द रोकने की मांग जनता के बीच जोर पकड़ रही है।








