– 24 घंटे में पदाधिकारियों के साथ बैठक का मुख्यमंत्री का आश्वासन
नागपुर :- महाराष्ट्र के शालेय पोषण आहार कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर नागपुर के संविधान चौक पर राज्यव्यापी महामोर्चा निकाला। आयटक यूनियन के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष रसोइयों और सहायकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयटक पदाधिकारियों से फोन पर चर्चा कर 24 घंटे के भीतर पदाधिकारियों के साथ बैठक कर मांगों पर चर्चा एवं समाधान का आश्वासन दिया।
शालेय पोषण आहार कर्मचारी पिछले करीब 20 वर्षों से स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने का काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि भोजन पकाने के साथ-साथ खाना परोसना, बर्तन साफ करना और अन्य जिम्मेदारियां भी वे निभाते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान में केवल 2,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होने की बात कर्मचारियों ने कही। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि करने की घोषणा की गई थी, लेकिन इसका शासनादेश (जीआर) अब तक जारी नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने तत्काल जीआर जारी कर बढ़ा हुआ मानदेय लागू करने की मांग की।
आयटक के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड श्यामजी काले और महासचिव कामरेड विनोद झोडगे ने कहा कि मानदेय वृद्धि का जीआर तत्काल जारी नहीं किया गया और बैठक में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आगामी शीतकालीन अधिवेशन के दौरान आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के बंगले पर जाकर ‘खिचड़ी’ पकाने के आंदोलन की चेतावनी भी दी। महामोर्चे में कॉ. भगवान पाटिल, शिवकुमार गणवीर, वनीता कुंटावार, मुगाजी बुरुड, दिवाकर नागपुरे, कविता उमप, मोहन वानखेडे, हिम्मत गवई, नामदेव शिंदे, महादेव पाटिल, विट्ठल सुले, श्रीधर वाढइ, कुंदा कोहपरे और जयमाला बेलगे सहित आयटक के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।





