– प्रस्तावित एमडीआर का विरोध, यूपीआई स्कैनर पर काला कपड़ा ढककर जताया विरोध
नागपुर – नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स के आह्वान पर 2 अक्टूबर को शहर के व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का विरोध किया। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढककर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।
चेंबर अध्यक्ष प्रदीप जाजू ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। इसका अप्रत्यक्ष असर कीमतों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित एमडीआर पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की। चेंबर के पूर्व अध्यक्ष सीए कैलाश जोगानी ने कहा कि यूपीआई व्यापारियों और ग्राहकों के लिए भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में इस पर अतिरिक्त लागत लगाने से छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। उन्होंने यूपीआई पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगाने की मांग की।
सरकार की घोषित व्यवस्था के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होना है। हालांकि, व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और 2,000 रुपये तक के भुगतान समेत बड़ी संख्या में लेनदेन इसके दायरे से बाहर हैं। सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत पी2एम (व्यक्ति से व्यापारी) लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।चेंबर सचिव तरुण निर्बाण और पूर्व अध्यक्ष गोविंद पसारी ने भी सरकार से व्यापारियों की चिंताओं को देखते हुए प्रस्तावित एमडीआर का निर्णय वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था व्यापारियों के लिए सरल और कम लागत वाली रहनी चाहिए।
इस अवसर पर वसंत पालीवाल, निखिल काकानी, विनोद पवार, शंकरलाल खंडेलवाल, महेश बंग, विवेक उखलकर, संदीप खेमका, महेंद्र कटारिया, आशीष खंडेलवाल, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, रविंद्र चांडक, प्रशांत जग्यासी, नाथाभाई पटेल और संजय पांडे सहित अन्य व्यापारी उपस्थित थे।








